
Hindu board : सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) कानून-2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान एक अहम सवाल उठा। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह हिन्दू धार्मिक न्यासों (Hindu board) में मुसलमानों को सदस्य बनने की अनुमति देगी? यह सवाल न सिर्फ कानूनी बहस को नई दिशा देता है, बल्कि धार्मिक न्यासों की संरचना और प्रबंधन पर भी चर्चा को हवा देता है।
देश में फिलहाल कोई "हिन्दू बोर्ड" नामक संस्था नहीं है, लेकिन विभिन्न मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के संचालन के लिए कई न्यास (ट्रस्ट) मौजूद हैं। इनका संचालन विशेष धार्मिक न्यास कानूनों के तहत होता है। Hindu board :
भारत में धार्मिक न्यास अधिनियमों का मकसद धार्मिक संस्थानों और उनकी संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। प्रमुख कानूनों में धर्मार्थ और धार्मिक न्यास अधिनियम-1920 और धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम-1863 शामिल हैं।
अयोध्या राम मंदिर: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अधीन
तिरुपति बालाजी मंदिर: तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट द्वारा संचालित
वैष्णो देवी मंदिर: श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर
उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में अपने-अपने धार्मिक न्यास अधिनियम हैं। इनमें से तमिलनाडु में सबसे अधिक मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं। 2025 की प्रयागराज धर्म संसद में सनातन बोर्ड (हिन्दू बोर्ड) के गठन की मांग उठी थी। प्रस्तावित "हिन्दू अधिनियम-2025" के तहत इसे एक स्वतंत्र निकाय बनाने की बात कही गई थी। Hindu board :
हिंदू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण की आलोचना होती रही है, खासकर तब जब मुस्लिम और ईसाई संस्थान अपने समुदायों द्वारा संचालित होते हैं। यही मुद्दा फिर से उभर कर आया है, और सुप्रीम कोर्ट के सवाल ने इसे और अधिक प्रासंगिक बना दिया है। Hindu board :