
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस बल में कार्यरत महिलाओं (Female police force) में से लगभग 90% महिलाएं केवल जूनियर पदों—जैसे कांस्टेबल या हेड कांस्टेबल—पर कार्यरत हैं। वरिष्ठ स्तर पर महिलाएं लगभग अनुपस्थित हैं। देश भर में केवल 1,000 से कम महिलाएं पुलिस अधीक्षक (Female police force) या उससे ऊंचे पदों पर हैं। IPS में सिर्फ 960 महिलाएं हैं, जबकि कुल IPS अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 5,047 है। सब-इंस्पेक्टर स्तर पर 52%, ASI में 25% और कांस्टेबल पद पर 13% महिलाएं हैं।
निचली अदालतों में 38% महिला जज हैं, लेकिन जैसे-जैसे स्तर ऊपर बढ़ता है, उनकी संख्या घटती जाती है। उच्च न्यायालयों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 14% है। भारत में 10 लाख की आबादी पर केवल 15 जज उपलब्ध हैं, जो कि 1987 के विधि आयोग की 50 जजों की अनुशंसा से काफी कम है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक-एक जज पर 15,000 से अधिक मुकदमे लंबित हैं। लगभग सभी उच्च न्यायालयों में 33% पद खाली हैं।
हालांकि देश भर में हालात चिंताजनक हैं, फिर भी कुछ राज्य सुधार की दिशा में आगे बढ़े हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु ने महिला प्रतिनिधित्व और आधारभूत संरचना के स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। मध्य प्रदेश में 133 महिला पुलिस उपाधीक्षक हैं और महिला हेल्प डेस्क की संख्या में भी इज़ाफा हुआ है। वहीं, कानूनी सहायता पर खर्च भी बढ़ा है और जिला न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी 38% तक पहुंच चुकी है। Female police force :