
रुपये में इस तेजी के कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं:
सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपये (Indian Rupees) ने 12 पैसे की वृद्धि के साथ 85.86 का स्तर छुआ। इस वृद्धि का मुख्य कारण घरेलू फ्लो में मजबूती है, जिससे रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि, कुछ जोखिम जैसे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तरलता की कमी भी रुपये के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में आगामी दिनों में 85.55 का समर्थन स्तर देखा जा सकता है। HDFC सिक्योरिटीज के अनुज गुप्ता का कहना है कि रुपये-डॉलर की रेंज 85.55-86.45 के बीच रह सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ के लागू होने के बाद अप्रैल से रुपये (Indian Rupees) में और बदलाव हो सकते हैं। यह देखा जाएगा कि वैश्विक आर्थिक हालात और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की स्थिति भी रुपये के मुकाबले महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यह 104.15 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 71.89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो रुपये के लिए सकारात्मक है। इन कारकों से रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 14 मार्च को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 305 मिलियन डॉलर बढ़कर 654.271 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए 10 बिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा स्वैप के कारण हुई है, जो रुपये (Indian Rupees) को और मजबूत करने में मदद कर रहा है।Indian Rupees :