गंगा जल को लेकर दिए गए राज ठाकरे के बयान पर संत समाज में आक्रोश
Sangam Snan
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:47 AM
Sangam Snan : महाकुंभ मेले के दौरान संगम में पवित्र डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा की गई टिप्पणी से संत समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। राज ठाकरे ने मनसे के 19वें स्थापना दिवस पर कार्यकतार्ओं को संबोधित करते हुए गंगा के जल की स्वच्छता पर सवाल उठाए और महाकुंभ में स्नान करने वालों का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि वे गंगा के उस जल को नहीं छूएंगे जिसमें करोड़ों लोग स्नान कर चुके हैं। इसके साथ ही, उन्होंने महाकुंभ से लाए गए गंगाजल का आचमन करने से भी इनकार किया।
संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी
राज ठाकरे के इस बयान पर संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संतों का मानना है कि महाकुंभ सनातन संस्कृति की आत्मा है और उसकी पवित्रता पर सवाल उठाना अनुचित है। उन्होंने राज ठाकरे से अपने बयान पर खेद प्रकट करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। संत समाज का कहना है कि महाकुंभ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की दिव्यता और भव्यता का प्रतीक है, जिसकी पवित्रता पर इस प्रकार की टिप्पणियां आस्था का अपमान हैं।
पहले भी आए थे ऐसे बयान
गौरतलब है कि इससे पहले भी महाकुंभ को लेकर विवादित बयान सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ को 'मृत्यु कुम्भ' कहा था, जिससे संत समाज में आक्रोश फैल गया था। संतों ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए ममता बनर्जी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की थी। संत समाज का कहना है कि राजनेताओं को धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतना चाहिए और आस्था का सम्मान करना चाहिए। महाकुंभ जैसे पवित्र आयोजनों की महिमा को समझते हुए, उनकी पवित्रता पर सवाल उठाने से बचना चाहिए, ताकि समाज में सद्भाव और सम्मान बना रहे।