
कौशांबी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सरोज (SP Leader) ने कहा, "अगर भारत के मंदिरों में कोई शक्ति होती, तो मुहम्मद-बिन-कासिम, महमूद गजनवी और मोहम्मद गौरी जैसे आक्रमणकारी इस देश को लूटने नहीं आते।" उन्होंने यह बयान मंदिरों की धार्मिक ताकत पर संदेह जताते हुए दिया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
इंद्रजीत सरोज (SP Leader) ने प्रसिद्ध कवि तुलसीदास पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तुलसीदास ने तथाकथित "नकली हिंदुओं" पर तो काफी लिखा, लेकिन उस समय के मुस्लिम शासकों पर कुछ नहीं कहा। सरोज का आरोप था कि मुगल काल में तुलसीदास में मुस्लिम शासकों की आलोचना करने का साहस नहीं था, जबकि दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए उन्होंने कई नकारात्मक बातें लिखीं।
सरोज ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दलित उत्पीड़न और हत्या जैसे मामलों का जिक्र करते हुए राज्य में "व्यापक अन्याय और अत्याचार" की बात कही। साथ ही उन्होंने मायावती पर भाजपा के सामने "सरेंडर" करने का आरोप लगाया और उन्हें भाजपा की "सहयोगी" करार दिया।
सपा नेता (SP Leader) के बयान को कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने आंशिक समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि भगवान को राजनीति में घसीटना गलत है और इससे मंदिरों की गरिमा भी प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आज भगवान को दिलों से निकालकर सियासत में लाया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। SP Leader :