सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून पर निर्णय सुरक्षित रखा
Supreme Court Decision
भारत
चेतना मंच
22 May 2025 10:48 PM
Supreme Court Decision : 22 मई 2025 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली और अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। सरकार ने तर्क दिया कि वक्फ इस्लाम की एक अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का आवश्यक धार्मिक अभ्यास नहीं है। इसलिए, इसे मौलिक अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता। सरकार ने यह भी बताया कि वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण 1923 से अनिवार्य है, लेकिन इसे अक्सर नजरअंदाज किया गया है, जिससे पारदर्शिता की कमी हुई है।
याचिकाकतार्ओं की आपत्तियाँ
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने अधिनियम का विरोध करते हुए कहा कि यह इस्लाम की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि वक्फ इस्लाम का अभिन्न अंग है और नए संशोधन, विशेष रूप से 'वक्फ बाय यूजर' की समाप्ति और गैर-मुस्लिम सदस्यों की वक्फ बोर्डों में नियुक्ति, धार्मिक स्वायत्तता का उल्लंघन करते हैं।
अदालत की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं होता, अदालतें विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा पारित कानूनों को संविधान के अनुरूप माना जाता है, जब तक कि स्पष्ट रूप से विपरीत न हो।
अब अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जो आने वाले हफ्तों में सुनाया जा सकता है। इस निर्णय से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। Supreme Court Decision