
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद(Swami Avimukteshwarananda)ने कहा कि महाकुंभ के दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से गायों की रक्षा के लिए एक विशेष कानून बनाने की मांग की थी। उनका मानना था कि गाय को ‘माता’ का दर्जा देना चाहिए, ताकि उसे संरक्षित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक दल गायों के पक्ष में बातें करते हैं, लेकिन असल में कोई भी गोहत्या के बढ़ते आंकड़ों पर चर्चा नहीं करता। स्वामी जी ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर अनदेखी की है और गायों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। महाकुंभ के आखिरी दिन स्वामी जी ने सरकार को 33 दिनों का समय दिया था, जिसे 33 करोड़ देवताओं का प्रतीक माना गया। उनका यह संदेश था कि यदि सरकार गायों के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो वे इसे जनता के सामने लाएंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद(Swami Avimukteshwarananda) ने 17 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में गो-रक्षा के लिए एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने स्वीकृति भी दी थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने उनके अनुरोध को रद्द कर दिया। स्वामी जी ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जनता के हित में आवाज उठाना था और वे चाहते थे कि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय दें। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल या तो गोहत्या के खिलाफ खड़े हों या फिर चुप रहकर इसे बढ़ने दें। उनका कहना था कि यह देश की आस्था और संस्कृति से जुड़ा मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्वामी जी ने कहा कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर गंभीर कदम नहीं उठाएगी, तब तक वे इस पर आवाज उठाते रहेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद(Swami Avimukteshwarananda) के बयान से साफ है कि वे गो-रक्षा के मुद्दे को एक राष्ट्रीय समस्या मानते हैं, जिसे हल करने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे।Swami Avimukteshwarananda: