तमिलनाडु में सियासी पेच : गठबंधन तय, लेकिन नेतृत्व की दावेदारी बीजेपी के सहयोगी दल ने किया
Tamil Nadu Politics
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 05:11 PM
Tamil Nadu Politics : तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव अभी दो साल दूर हैं, लेकिन राज्य की राजनीति में हलचल अभी से तेज हो चुकी है। बीजेपी और AIADMK (अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम) के बीच एक बार फिर गठबंधन की बात पक्की होती दिख रही है, लेकिन इस गठबंधन में नेतृत्व को लेकर मतभेद पहले से ही सतह पर आ चुके हैं।
पलानीस्वामी ने ठोका दावेदारी का डंका
बीजेपी जहां खुद को राज्य में विकल्प के तौर पर पेश करने की रणनीति पर चल रही है, वहीं AIADMK प्रमुख ई. पलानीस्वामी (EPS) ने गठबंधन की राजनीति में साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर NDA तमिलनाडु में सत्ता में आती है, तो मुख्यमंत्री वही बनेंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री पद का फैसला AIADMK ही करेगी।
स्टालिन सरकार पर तीखा वार
पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के "उंगलुदन स्टालिन" अभियान को "राजनीतिक नाटक" करार देते हुए दावा किया कि इस सरकार का कार्यकाल अब गिनती के महीनों का रह गया है और जनता बदलाव चाहती है। 2021 विधानसभा चुनाव में AIADMK-बीजेपी गठबंधन को लगभग 40% वोट मिले थे, जबकि DMK-कांग्रेस गठबंधन को करीब 45%। 2023 में जब के. अन्नामलाई को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, तभी से AIADMK से रिश्ते बिगड़ने लगे और गठबंधन टूट गया। 2024 लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़ा। AIADMK को 20.46% वोट मिले जबकि बीजेपी को 11.24% वोट मिले। संयुक्त वोट प्रतिशत 41% तक पहुंचा, फिर भी जीत से दूर रह गए। उधर, DMK गठबंधन को 47% से ज्यादा वोट मिलकर शानदार जीत मिली।
बीजेपी की रणनीति : हकीकत से टकराव
बीजेपी ने तमिलनाडु में पिछले कुछ वर्षों में अपनी जमीन मजबूत जरूर की है, लेकिन अभी भी राज्य की राजनीति में निर्णायक ताकत बनने से काफी दूर है। यही वजह है कि पार्टी अब एक बार फिर एआईएडीएमके के साथ गठबंधन में वापसी कर रही है। हालांकि, गठबंधन की इस संभावित वापसी के साथ ही सियासी असहजता भी साफ नजर आ रही है। क्योंकि जहां बीजेपी खुद को एक उभरती ताकत के तौर पर देख रही है, वहीं एआईएडीएमके नेतृत्व स्पष्ट कर रहा है कि सत्ता में हिस्सेदारी सिर्फ उसके नेतृत्व में ही संभव होगी।
तो सवाल यह है, ये कैसा गठबंधन?
जब गठबंधन की नींव ही नेतृत्व के सवाल पर डगमगा रही हो, तो क्या यह साथ लंबा चलेगा? और क्या बीजेपी इस बार भी 'छोटे भाई' की भूमिका स्वीकार करेगी, या फिर नए समीकरणों की ओर रुख करेगा? तमिलनाडु की राजनीति में जहां एक ओर डीएमके का गठबंधन मजबूत दिखता है, वहीं विपक्षी मोर्चे की दिशा और नेतृत्व को लेकर तस्वीर अब भी धुंधली है।