
Vijay Shah : कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ विवादित टिप्पणी ने मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आज सुप्रीम कोर्ट में उस एसआईटी रिपोर्ट की सुनवाई हो रही है, जो न केवल इस मामले की तह तक जाएगी, बल्कि देश के नेताओं की जिम्मेदारी और न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता को भी परखने का एक बड़ा मोड़ साबित होगी।
मंत्री विजय शाह ने 12 मई को इंदौर जिले के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में एक जनसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए "उसी समुदाय की एक बहन को पाकिस्तान भेजा"। इस बयान को कर्नल सोफिया कुरैशी से जोड़कर देखा गया और पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई। बयान को न सिर्फ महिला विरोधी, बल्कि सांप्रदायिक और सेना के गौरव को ठेस पहुंचाने वाला माना गया।
जनआक्रोश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया कि एक महिला आईपीएस अधिकारी सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एसआईटी बनाई जाए। आदेश दिया गया कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी पुलिस महानिरीक्षक (IG) के स्तर से नीचे का नहीं होगा, जबकि अन्य दो सदस्य पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर के होंगे।
डीजीपी कैलाश मकवाना के नेतृत्व में गठित SIT ने तेजी से काम शुरू किया। जांच दल ने उस स्थान का दौरा किया जहां विवादित बयान दिया गया था, चश्मदीदों से बयान लिए, वीडियो फुटेज खंगाले और साक्ष्य एकत्र किए। इसके साथ ही महू के स्थानीय सरपंच और पंचायत सचिव से भी पूछताछ की गई। Vijay Shah