धराली के बाद सुक्खी टॉप में भी बादल फटा, सेना और प्रशासन अलर्ट मोड में
भारत
चेतना मंच
05 Aug 2025 07:35 PM
Uttarkashi Disaster : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में प्राकृतिक आपदा का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को हर्षिल घाटी के साथ-साथ सुक्खी टॉप और धराली गांव में बादल फटने की घटनाएं सामने आईं, जिससे कई इलाके तबाही की चपेट में आ गए। ताजा घटनाक्रम में सुक्खी टॉप के सामने बहने वाली भेला गाड़ में अचानक आई तेज बाढ़ ने स्थानीय लोगों को भयभीत कर दिया है। प्रशासन और सेना ने तत्परता दिखाते हुए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
धराली में भारी तबाही, 5 की मौत, दर्जनों लापता
धराली गांव के पास खीर गंगा नदी के ऊपर बादल फटने के बाद आई बाढ़ में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं। क्षेत्र में मौजूद करीब 20 से 25 होटल और होम स्टे बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मलबे में दबे लोगों को खोजने का प्रयास जारी है।
सुक्खी टॉप में भी फटा बादल, गांव में दहशत
धराली के अलावा सुक्खी टॉप पर भी बादल फटने की पुष्टि हुई है। इसके बाद भेला गाड़ में उफान आ गया और पानी तेज गति से बहने लगा। गांव में दहशत का माहौल है, लेकिन राहत की बात यह है कि अब तक किसी जनहानि की खबर नहीं है। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को मौके पर भेज दिया गया है। गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
सेना ने संभाला मोर्चा
हर्षिल घाटी में सेना का कैंप पहले से मौजूद होने के कारण घटनास्थल पर महज 10 मिनट में सेना की टुकड़ी पहुंच गई। सेना की आईब्रेक्स ब्रिगेड के जवान राहत-बचाव कार्य में जुट गए हैं। सेना ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा है कि "आपदा की इस घड़ी में हम उत्तरकाशी के लोगों के साथ खड़े हैं।"
कुल तीन जगह फटे बादल, हालात चिंताजनक
मंगलवार को उत्तरकाशी जिले में कुल तीन जगह बादल फटने की घटनाएं हुईं। हर्षिल घाटी, धराली और सुक्खी टॉप। तीनों ही क्षेत्रों में पहाड़ी इलाकों से आए मलबे ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर भारी मलबा और टूटे हुए रास्तों के कारण राहत टीमें भी कई जगहों पर पैदल पहुंचने को मजबूर हैं।
प्रशासन की अपील : सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
जिला प्रशासन ने सभी प्रभावित और आस-पास के क्षेत्रों के लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और सतर्क रहें। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और हालात पर नजर बनाए हुए है। यह आपदा एक बार फिर साबित करती है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र कितने संवेदनशील हैं और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।