खतरे में है 30 लाख इमारतें! बस जरा सी देरी और सबकुछ फना
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:12 PM
जलवायु परिवर्तन का सबसे खतरनाक लेकिन धीमा असर है समुद्र का लगातार बढ़ता स्तर। मैकगिल यूनिवर्सिटी की नई स्टडी बताती है कि अगर हमने ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रोका तो सदी के अंत तक दुनिया भर में 10 करोड़ से ज्यादा इमारतें समंदर में डूब सकती हैं। इस रिसर्च को Nature Urban Sustainability जर्नल में प्रकाशित किया गया है और यह अब तक का सबसे गहन अध्ययन माना जा रहा है जिसमें इमारत-दर-इमारत खतरे का आकलन किया गया है। Sea Level Rise 2025
30 लाख इमारतें खतरे में
शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट इमेज और ऊंचाई के आंकड़ों की मदद से यह अनुमान लगाया कि अगर समुद्र स्तर सिर्फ 0.5 मीटर भी बढ़ता है तो करीब 30 लाख इमारतें जलमग्न हो जाएंगी। यह खतरा तब भी है जब हम उत्सर्जन में कुछ हद तक कटौती कर लें। लेकिन अगर कटौती नहीं हुई और समुद्र स्तर 5 मीटर या उससे ज्यादा बढ़ा तो 10 करोड़ से भी ज्यादा इमारतें इसकी चपेट में आ सकती हैं जिनमें लाखों घर, ऑफिस, बंदरगाह, तेल रिफाइनरी और ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।
भारत के लिए खतरे की घंटी
भारत इस संकट से अछूता नहीं रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई का 21.8% इलाका (1,377 वर्ग किमी) सदी के अंत तक पानी में डूब सकता है। अभी से 830 वर्ग किमी जोन खतरे में है। चेन्नई का 18% हिस्सा (215 वर्ग किमी) 2100 तक जलमग्न हो सकता है जबकि 2040 तक 7.3% पहले ही डूब जाएगा। लक्षद्वीप के द्वीपों पर समुद्र हर साल 0.4 से 0.9 मिमी की दर से बढ़ रहा है और अमिनी व चेतलाट द्वीपों का 60-80% हिस्सा डूबने के खतरे में है। यानम, थूथुकुड़ी, पणजी, कोच्चि, मैंगलोर, विशाखापत्तनम, पुरी और पारादीप जैसे शहरों में 1-10% तक की जमीन प्रभावित हो सकती है।
जिंदगियां और अर्थव्यवस्था भी दांव पर
इस बदलाव का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा। तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोग बेघर हो सकते हैं। बंदरगाहों के जलमग्न होने से व्यापार, ईंधन आपूर्ति और खाद्य वितरण पर सीधा असर पड़ेगा। यह भारत की ही नहीं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर देगा। प्रोफेसर एरिक गैल्ब्रैथ के अनुसार, “जलवायु परिवर्तन सबको प्रभावित करेगा चाहे वे तट पर रहें या नहीं क्योंकि हमारी जरूरतें समुद्र से जुड़ी हैं।”
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब यह तय है कि समुद्र का स्तर कुछ हद तक बढ़ेगा ही। लेकिन अगर सरकारें और शहरी नियोजनकर्ता अभी से तैयारी शुरू करें तो कई जिंदगियों और इमारतों को बचाया जा सकता है। स्टडी के साथ एक इंटरएक्टिव मैप भी जारी किया गया है जो बताता है कि कौन से इलाके सबसे ज्यादा खतरे में हैं। इसका इस्तेमाल करके तटीय दीवारों का निर्माण, जमीन का दोबारा प्लानिंग और पुनर्वास योजनाएं बनाई जा सकती हैं।