
साल 1910 में वाराणसी की पावन भूमि पर हिन्दी भाषा और साहित्य के उत्थान के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन हुआ — प्रथम अखिल भारतीय हिन्दी सम्मेलन, जिसकी अध्यक्षता महान शिक्षाविद् मदन मोहन मालवीय ने की। उस समय हिंदी को राष्ट्रव्यापी पहचान दिलाने, साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय चेतना को जगाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सम्मेलन में देशभर से लेखक, विद्वान और भाषा प्रेमी उपस्थित हुए, जिन्होंने हिंदी की शैली, व्याकरण और साहित्यिक दृष्टिकोण पर गंभीर विचार-विमर्श किया। Today History
यह सम्मेलन न केवल हिंदी के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि भाषा प्रेमियों में एकता और संगठन की भावना भी उत्पन्न की। इसके परिणामस्वरूप हिंदी साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। Today History
हिंदी साहित्य के उन्नयन और संरक्षण के लिए प्रयाग में स्थापित अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन का बीजवपन काशी की नागरी प्रचारिणी सभा से जुड़ा हुआ है। कम ही लोग जानते हैं कि महामना मदन मोहन मालवीय के मन में हिंदी को “हिन्दुस्तान के माथे की बिंदी” बनाने का विचार नागरी प्रचारिणी सभा के प्रयासों से ही उत्पन्न हुआ। सम्मेलन के अध्यक्षीय संबोधन में मालवीय जी ने स्वयं स्वीकार किया कि इस आयोजन की कल्पना और उसकी रूपरेखा लंबे मंथन, विमर्श और बहस के बाद ही पल्लवित हुई।
आगे चलकर प्रयाग में साहित्य सम्मेलन का स्वतंत्र कार्यालय स्थापित हुआ और राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन जैसे कर्मठ व्यक्तित्वों के योगदान से संस्था ने गौरव के शिखर को छूना शुरू किया। महात्मा गांधी जैसे महनीय का आशीर्वाद मिलने के बाद संस्था ने हिंदी जगत में अपार प्रतिष्ठा अर्जित की।
काशी के हिन्दू विश्वविद्यालय का प्रसिद्ध राष्ट्रीय संग्रहालय (भारत कला भवन) भी नागरी प्रचारिणी सभा के ऋणी रहा। 22 वर्षों तक संग्रहालय की धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन सभा ने चौकसी के साथ किया। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की अध्यक्षता में स्थापित भारत कला परिषद का संग्रहालय (संवत 1986) सबसे पहले सभा के संरक्षण में आया और संवत 2007 तक इसका संवर्धन इसी संस्था ने सुनिश्चित किया।
संवत 2006 में सभा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की स्मृति में स्मारक बनवाया और उनके अनुज महता बाबू राय की पहल से लमही गांव में यह स्मारक स्थापित हुआ। स्मारक का शिलान्यास तत्कालीन राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद ने किया।
1756 – ब्रिटिश गवर्नर जनरल रॉबर्ट क्लाइव ने कलकत्ता पर पुन: कब्जा करने के लिए मद्रास से कूच किया।
1846 – ब्रिटिश खगोलविद विलियम लासेल ने नेपच्यून का प्राकृतिक उपग्रह खोजा।
1868 – क्यूबा ने स्पेन से स्वतंत्रता पाने के लिए विद्रोह किया।
1910 – वाराणसी में प्रथम अखिल भारतीय हिन्दी सम्मेलन आयोजित।
1964 – टोकियो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक का पहला दूरदर्शन प्रसारण।
1970 – फिजी ने स्वतंत्रता हासिल की।
1992 – दूसरा हुगली पुल ‘विद्यासागर सेतु’ का उद्घाटन।
2014 – कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार।
(अन्य घटनाओं को भी इसी सूची में शामिल किया जा सकता है।)
1899 – श्रीपाद अमृत डांगे, प्रारंभिक भारतीय कम्युनिस्ट नेता।
1906 – आर. के. नारायण, भारतीय उपन्यासकार।
1954 – रेखा, बॉलीवुड अभिनेत्री।
2011 – जगजीत सिंह, ग़ज़लों के बादशाह।
2022 – मुलायम सिंह यादव, समाजवादी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश। Today History
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