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देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के पोते और जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक गंभीर मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया है। यह फैसला ऐसे समय में आया जब देश में वीआईपी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस केस में कानून ने बेहद तेज़ी से और तथ्यों के आधार पर अपनी दिशा तय की। मैसूरु की एक घरेलू सहायिका द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले की जांच CID की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने की, जिसके नेतृत्व में 123 भौतिक सबूत, 23 चश्मदीद गवाहों की गवाही और एक बेहद मजबूत 2000 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। ट्रायल 31 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ और महज सात महीनों में अदालत ने सभी गवाहों के बयान दर्ज कर, केस को निर्णायक अंजाम तक पहुंचाया। Prajwal Revanna
पीड़िता द्वारा अदालत में एक साड़ी सबूत के रूप में पेश की गई थी, जिसमें आरोपी का सीमेन पाया गया। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि यह बलात्कार का अहम वैज्ञानिक प्रमाण है। यही नहीं, SIT ने वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल्स और डिजिटल सबूतों को भी चार्जशीट में शामिल किया।
जैसे ही अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, प्रज्वल रेवन्ना कोर्ट में ही फूट-फूटकर रोने लगे। बाहर निकलते वक्त वे visibly shaken दिखे। अब इस केस में सज़ा का ऐलान शनिवार को किया जाएगा। IPC और IT एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत सज़ा तय की जाएगी। 48 वर्षीय पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2021 में हासन जिले के गन्निकाडा फार्महाउस पर रेवन्ना ने दो बार उसके साथ बलात्कार किया और इसका वीडियो भी बनाया। इसके बाद ब्लैकमेल और यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। यही नहीं, चार और केस भी उनके खिलाफ दर्ज हैं। विवाद तब और गहरा गया जब 2024 लोकसभा चुनाव से पहले रेवन्ना से जुड़े कई आपत्तिजनक वीडियो सार्वजनिक हुए। हासन से चुनाव हारने के बाद जद(एस) ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। वह मई 2024 में जर्मनी से लौटने के बाद बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किए गए। Prajwal Revanna
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