भारतीय संविधान सभा लिखने वाले सदस्यों की संख्या 299 थी। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद इसके अध्यक्ष थे। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अपना काम पूरा किया और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू कर दिया गया। इसे तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 8 दिन लग गए थे।

भारत तथा भारत के इतिहास के लिए 26 नवंबर का दिन बहुत बड़ा दिन है। 26 नवंबर के दिन को भारत का इतिहास हमेशा याद रखेगा। दरअसल 26 नवंबर ही वह तारीख वह दिन है जिस दिन भारत का संविधान अधिकारिक रूप से स्वीकृत किया गया था। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था, किन्तु भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया था।
भारत में 15 अगस्त का दिन स्वतंत्रता दिवस के रूप में तथा 26 जनवरी का दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। 15 अगस्त तथा 26 जनवरी भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व हैं। इसी कड़ी में ही 26 नवंबर का दिन भी भारत के लिए राष्ट्रीय पर्व से कम नहीं है। 26 नवंबर को हर साल भारत में संविधान दिवस मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान बनाने वाली समिति संविधान सभा ने भारत के संविधान को स्वीकृति (अपनाया) प्रदान की थी। संविधान को स्वीकृति मिलने के दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष-2015 से पहले भारत में संविधान दिवस नहीं मनाया जाता था। भारत सरकार ने 19 नवंबर 2015 को यह घोषणा की थी कि हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस मनाया जाएगा। वर्ष-2015 से हर साल पूरे भारत में संविधान दिवस मनाया जाता है।
भारत का संविधान दुनिया में सबसे बड़ा संविधान है। भारत का संविधान जितना बड़ा है उतना ही बड़ा है भारत के संविधान का इतिहास। भारत का संविधान बनाने में पूरे 2 साल 11 महीने तथा 8 दिन लग गए थे। आपको बता दें कि भारत का संविधान सभा बनाई गई थी। भारतीय संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 में हुआ था। भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। 14-15 अगस्त की रात भारत-पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे के बाद ये संविधान सभा भी दो भागों में बंट गई। भारतीय संविधान सभा लिखने वाले सदस्यों की संख्या 299 थी। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद इसके अध्यक्ष थे। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अपना काम पूरा किया और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू कर दिया गया। इसे तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 8 दिन लग गए थे।
भारत के प्रसिद्ध नेता डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत के संविधान का निर्माता कहा जाता है। दरअसल डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत के संविधान के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई थी। डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे, जिसके कारण उन्हें 'संविधान का निर्माता' कहा जाता है। उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों को शामिल करने के लिए संविधान का मसौदा तैयार किया, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करना था। उन्होंने भारत के संविधान में आरक्षण जैसे प्रावधान भी शामिल किए, ताकि समाज के वंचित वर्गों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके। भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है। भारत के संविधान के अनुसार, भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, जिसका अर्थ है कि सभी धर्मों को समान सम्मान मिलता है और राज्य का कोई अपना धर्म नहीं है। यह एक संघात्मक प्रणाली है, जिसमें एक मजबूत केंद्र है, जो इसे केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन के साथ एकात्मक तत्वों को भी प्रदर्शित करता है। भारत के संविधान को दुनिया में सबसे महान संविधान होने का गौरव प्राप्त है। भारत के लोग अपने संविधान पर गर्व करते हैं।