37 लाख डॉग बाइट, 54 मौतें… अब नहीं रहेंगे स्ट्रीट डॉग्स सड़क पर
दिल्ली
RP Raghuvanshi
12 Aug 2025 01:19 PM
दिल्ली
RP Raghuvanshi
12 Aug 2025 01:19 PM
देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। डॉग बाइट, रेबीज से मौतें और लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को अदालत ने दिल्ली-NCR में मौजूद सभी आवारा कुत्तों को 8 सप्ताह के भीतर शेल्टर होम में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इन कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद फिर से सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा। Stray Dogs
आंकड़े डराने वाले हैं
2024 में पूरे भारत में 37 लाख से अधिक डॉग बाइट केस दर्ज हुए। इनमें से 5.19 लाख पीड़ित 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे। सिर्फ दिल्ली में जनवरी से जून 2024 के बीच 35,198 डॉग बाइट की घटनाएं दर्ज की गईं। रेबीज से 54 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 के मुकाबले अधिक हैं। डॉग बाइट मामलों में 143% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली में लगभग 10 लाख आवारा कुत्ते, जिनमें से 50% से कम की ही नसबंदी हुई है।
कोर्ट के निर्देश क्या हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या को “गंभीर और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा” बताया। कोर्ट ने कहा, 8 हफ्तों में सभी स्ट्रीट डॉग्स को शेल्टर होम में भेजा जाए।वहां नसबंदी और टीकाकरण अनिवार्य रूप से किया जाए। डॉग बाइट की शिकायतों के लिए एक सप्ताह में हेल्पलाइन नंबर शुरू किया जाए। जो भी व्यक्ति शेल्टर की प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी। दिल्ली सरकार को वैक्सीन स्टॉक और इलाज से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। कम से कम 5,000 कुत्तों की क्षमता वाले शेल्टर होम बनें और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती की जाए।
समय पर वैक्सीन ही उपाय
रेबीज एक जानलेवा वायरस संक्रमण है जो मुख्यतः कुत्तों के काटने से फैलता है। एक बार लक्षण दिखने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है, इसलिए समय पर वैक्सीन लेना बेहद जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में होने वाली कुल रेबीज मौतों में से 36% भारत में होती हैं। यह आंकड़ा हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था और पशु प्रबंधन पर सवाल उठाता है।
कहां चूकी सरकारें?
पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम 2023 के तहत नसबंदी और टीकाकरण जरूरी है लेकिन अभी तक दिल्ली में इसके क्रियान्वयन में भारी लापरवाही देखी गई है। 10 लाख में से आधे से भी कम कुत्तों की नसबंदी हुई है। ऐसे में आबादी लगातार बढ़ रही है, और साथ में बढ़ रहा है आम जनता का खतरा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर समाज में दो राय देखने को मिल रही है। एक ओर लोग डॉग अटैक से त्रस्त हैं और इस आदेश को राहत की तरह देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनिमल एक्टिविस्ट्स और पेट लवर्स इसे अत्यधिक और क्रूर कदम मान रहे हैं।
साफ है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बार आवारा कुत्तों के मुद्दे को टालने की बजाय हल करने की दिशा में कदम उठाया है। यह देखने वाली बात होगी कि दिल्ली और एनसीआर की सरकारें कोर्ट के आदेशों का कितना पालन करती हैं, और क्या ये कदम वास्तव में जनहित और पशुहित के संतुलन को बना पाएगा। Stray Dogs