कोरोना से हुई मौत पर हर पीड़ित परिवार को मिलेगा 50 हजार का मुआवजा : सुप्रीम कोर्ट
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 02:10 PM
नई दिल्ली। देश भर में कोरोना के चलते जान गंवाने वाले उन लाखों परिवारों को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है जिन्होंने इस महामारी में अपनों को खोया है और सरकार की तरफ से राहत की आस लगाकर बैठे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार की उस योजना पर अपनी मुहर लगा दी जिसमें केंद्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए यह कहा था कि कोरोना से हुई मौत पर परिजनों को केंद्र सरकार 50 हजार रुपये का मुआवजा देगी। देश की शीर्ष अदालत ने आज इसको लेकर एक विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मुआवजा राज्यों द्वारा पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि से अलग होगा। ये मुआवजा भविष्य में होने वाली मौतों पर भी लागू होगा। इसका भुगतान राज्य आपदा राहत कोष द्वारा किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि लाभार्थी का पूरा विवरण प्रिंट मीडिया में प्रकाशित किया जाए। अदालत ने आदेश में कहा कि मृतक के परिजनों को 50,000 रुपये की राशि का भुगतान हर हाल में किया जाएगा और यह विभिन्न परोपकारी योजनाओं के तहत केंद्र और राज्य द्वारा भुगतान की गई राशि से अलग होगा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि पीड़ित परिवार मृत्यु प्रमाण पत्र सहित दस्तावेजों के साथ राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी एक फार्म के माध्यम से अपने दावे प्रस्तुत करेंगे। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से दस्तावेज देने के 30 दिनों के अंदर सभी दावों का निपटारा किया जाएगा। प्रमाणीकरण समिति दावों को खारिज करने का कारण स्पष्ट करेगी। भविष्य में भी महामारी की लहरों में होने वाली मौतों के लिए अनुग्रह राहत जारी रहेगी।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि देश का कोई भी राज्य मुआवजा देने से यह कह कर नहीं बच सकते कि डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह कोरोना नहीं लिखी। इसके लिए राज्य जल्द से जल्द हर जिले में कमिटी के गठन की अधिसूचना जारी करें जहां लोग मुआवजे की मांग रख सकें। साथ ही डेथ सर्टिफिकेट में सुधार के लिए भी आवेदन दे सकें। साथ ही कोर्ट ने कहा कि कोरोना के चलते जिनकी मृत्यु घर पर हुई है उनका परिवार भी मुआवजे का हकदार होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पस्ट करते हुए कहा कि ये मुआवजा आवेदन जमा करने और मृत्यु के कारण को कोविड-19 के रूप में प्रमाणित होने के 30 दिनों के भीतर दिया जाए। कोई भी राज्य इस आधार पर 50,000 रुपये के लाभ को देने से इनकार नहीं कर सकते कि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु का कारण कोविड-19 नहीं है। जिला अधिकारियों को मौत के कारणों को ठीक करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। जिला स्तरीय समिति द्वारा बनाए गए विवरण प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रकाशित किए जाएंगे। कोविड होने के बाद 30 दिन के अंदर खुदकुशी करने वालों को भी इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोरोना से हुई मौत के लिए मुआवजे की घोषणा पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भारत सरकार ने जो किया वैसा और कोई देश नहीं कर सका। केंद्र ने हर मौत के लिए 50 हजार रुपए मुआवजा तय करने की जानकारी कोर्ट को दी है। कोर्ट ने कहा कि यह खुशी की बात है कि जिन लोगों ने पीड़ा झेली, उनके आंसू पोंछने के लिए कुछ किया जा रहा है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने पीड़ित परिवारों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस बाबत हलफनामा दाखिल कर इसकी जानकारी दी थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुग्रह राशि राज्य आपदा सहायता कोष से दी जाएगी साथ ही यह राशि उन मृतकों के परिवारों को भी दी जाएगी जो कोविड राहत कार्यों में शामिल थे। केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में यह भी कहा था कि ये अनुग्रह राशि कोविड महामारी के भविष्य के चरणों में भी या अगली अधिसूचना जारी होने तक जारी रहेगी।