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बिहार सरकार ने राज्य में लंबे समय से लंबित चल रहे जमीन से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने के लिए बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।

Bihar Land Reform : बिहार सरकार ने राज्य में लंबे समय से लंबित चल रहे जमीन से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने के लिए बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। इस विशेष पहल के तहत केवल 7 दिनों में लाखों रैयतों के भूमि संबंधी मामलों का निष्पादन करने का लक्ष्य तय किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर यह अभियान 11 जून से 17 जून तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। इस दौरान सभी अंचलों में अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार काम करने का आदेश दिया गया है, और रविवार को भी छुट्टी रद रहेगी।
Bihar Land Reform
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जमीन से जुड़े उन मामलों को निपटाना है जो महीनों से लंबित पड़े हैं। इसमें खास तौर पर नामांतरण, उत्तराधिकार, बंटवारा और जमाबंदी सुधार जैसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि लंबे समय से अटके हुए भूमि विवाद और रिकॉर्ड सुधार कार्यों के कारण आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। इसी को देखते हुए विभाग ने यह सप्ताहभर का विशेष मिशन शुरू किया है।
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अभियान के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय मोड में रखा गया है। सभी अंचलाधिकारी (सीओ), राजस्व अधिकारी (आरओ) और संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे बिना किसी रुकावट के कार्य पूरा करें। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस अवधि में रविवार को भी अवकाश लागू नहीं होगा और सभी कार्यालय खुले रहेंगे।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले राजस्व महाअभियान के दौरान राज्यभर से करीब 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से बड़ी संख्या में मामले अब तक लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 81 प्रतिशत मामलों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन पोर्टल पर अपलोडिंग की गति काफी धीमी रही है, जो केवल करीब 26 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई है। इसी कारण सरकार ने अब विशेष अभियान चलाकर काम में तेजी लाने का निर्णय लिया है।
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इस विशेष अभियान में दो प्रमुख कार्यों पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाएगा-
* सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग
* सभी दस्तावेजों को संबंधित पोर्टल पर अपलोड करना।
इसके बाद मामलों के त्वरित निष्पादन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि लोगों को लंबा इंतजार न करना पड़े।
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अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत विशेष सर्वेक्षण अमीनों की भी सहायता ली जाएगी। इसके साथ ही अतिरिक्त कर्मचारियों को भी अंचलों में लगाया जाएगा ताकि काम की गति बढ़ाई जा सके। हालांकि कुछ जिलों को इस विशेष कार्य से अलग रखा गया है, क्योंकि वहां सर्वेक्षण संबंधी अन्य कार्य पहले से चल रहे हैं।
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मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने साफ निर्देश दिया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए। हर स्तर पर काम की निगरानी की जाएगी और प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी की जिम्मेदारी सीधे संबंधित अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों पर तय की जाएगी।
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बिहार सरकार का दावा है कि यह अभियान राज्य की भूमि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का उद्देश्य है कि आम लोगों को जमीन से जुड़े कामों के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
7 दिन का यह विशेष अभियान बिहार में भूमि प्रशासन सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। यदि यह अभियान सफल रहता है, तो लाखों लोगों को लंबे समय से लंबित मामलों से राहत मिल सकती है और राज्य की राजस्व व्यवस्था में तेज सुधार देखने को मिलेगा।
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