Coronavirus: इन 8 वजहों के चलते मोदी को फिर संभालनी पड़ी कोरोना से लड़ाई की कमान
PM Modi address to nation
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 12:23 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने 25 दिसंबर को ओमिक्रॉन (Omicron), बूस्टर डोज (Booster Dose), टीकाकरण (Vaccination) और तीसरी लहर (Third Wave) से निपटने की तैयारियों के बारे में अहम घोषणाएं की।
आगामी तीन जनवरी से 15 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान (Coronavirus) शुरू होगा। स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स सहित 60 वर्ष से अधिक उम्र के कोमॉर्बिटी वाले बुजूर्गों के लिए प्रिकॉशन डोज (बूस्टर डोज) के शुरूआत की भी घोषणा की गई। आगामी 10 जनवरी से बूस्टर डोज लगाने का अभियान शुरू हो जाएगा।
आखिर, प्रधानमंत्री को अचानक राष्ट्र के नाम संबोधन कर टीकाकरण (Vaccination), बूस्टर डोज (Booster Dose) और कोरोना (Corona) से लड़ने की तैयारी के बारे में देश को बताने की जरूरत क्यों आन पड़ी?
पहली वजह, देश में कोराना का नया वैरियंट ओमिक्रॉन (Omicron) तेजी से पैर पसार रहा है। ज्यादातर राज्यों में इसके मरीज सामने आ चुके हैं। साथ ही, दुनिया के अन्य देशों में भी ओमिक्रॉन (Omicron) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। नेशनल कोविड सुपरमॉडल पैनल पहले ही इस बात का अंदेशा जाहिर कर चुका है कि ओमिक्रॉन (Omicron) के चलते 2022 की शुरुआत में भारत में कोरोना की तीसरी लहर (Third Wave) आ सकती है और फरवरी में इसका पीक होगा।
ऐसे में प्रधानमंत्री देशवासियों को यह बताना चाहते हैं कि सरकार पूरी तरह से अलर्ट है और तीसरी लहर से निपटने की तैयारी जारी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि देश में 18 लाख आइसोलेशन बेड और 5 लाख ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड तैयार हैं। इसके अलावा 1 लाख 40 हजार आईसीयू बेड सहित बच्चों के लिए भी 90 हजार बेड तैयार हैं। साथ ही, 3000 ऑक्सीजन प्लांट भी काम कर रहे हैं।
दूसरी वजह, ओमिक्रॉन (Omicron) के बढ़ते खतरे के बीच पिछले कुछ दिनों से मीडिया लगातार सरकार पर यूपी में हो रही चुनावी रैलियों पर रोक लगाने का दबाव बना रही है। मामला तब और भी गंभीर हो गया जब बीते गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सीधे प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग (Election Commission) से चुनावी रैलियों पर रोक लगाने और चुनाव टालने की अपील कर दी।
चुनाव आयोग (Election Commission) ने अगले ही दिन प्रेस कांफ्रेंस मे अपना पक्ष रख दिया और अप्रत्यक्ष तौर पर हाईकोर्ट को बता दिया कि यूपी में ओमिक्रॉन (Omicron) के हालात पर आयोग की नजर है। अब प्रधानमंत्री की बारी थी। जाहिर सी बात है कि प्रधानमंत्री केवल यह नहीं कह सकते थे कि हालात पर सरकार की नजर है। उन्हें कुछ ठोस कार्ययोजना और तैयारियों को भी बताना था। इस तरह प्रधानमंत्री ने भी अप्रत्यक्ष तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) और मीडिया (Media) को अपना जवाब दे दिया है।
तीसरी वजह, इसी साल अप्रैल-मई में कोरोना की तीसरी लहर के बाद सरकार पर इससे निपटने की कोई तैयारी न करने का गंभीर आरोप लगा था। अस्पतालों में सामान्य बेड, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन की अचानक पैदा हुई भारी मांग के सामने देश की चिकित्सा व्यवस्था ने घुटने टेक दिए थे। देश ही नहीं, पूरी दुनिया में सरकार की बदनामी हुई जिसका खामियाज तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन (Harsh Vardhan) को अपना पद गंवा के चुकाना पड़ा।
चौथी वजह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 2020 में महामारी से निपटने की बागडोर अपने हाथ में ले रखी थी। कोरोना की पहली लहर के दुष्प्रभाव को कम करने में केंद्र सरकार के द्वारा घोषित सख्त लॉकडाउन (Lockdown) ने महत्वूपर्ण भूमिका अदा की थी। जबकि, दूसरी लहर से पहले मोदी सहित सरकार के बड़े मंत्रियों का ध्यान पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव पर था। सरकार की इस चूक के चलते देश को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा और पूरे विश्व में सरकार की फजीहत हुई। यही वजह है कि पीएम मोदी (PM Narendra Modi) एक बार फिर से फ्रंटफुट पर हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि भले ही वह यूपी में लगातार चुनावी रैलियां कर रहे हैं लेकिन, कोरोना के हालात पर उनकी पैनी नजर है।
पांचवीं वजह, टीकाकरण (Vaccination) अभियान की सफलता के चलते चारों ओर सरकार की तारीफ हो रही है। लेकिन, दुनिया के कई देशों में बूस्टर डोज (Booster Dose) लगने शुरू हो चुके हैं। मोदी सरकार पर बूस्टर डोज (Booster Dose) में देरी करने के आरोप लगने शुरू हो चुके हैं। मोदी नहीं चाहते कि टीकाकरण (Vaccination) के सफल अभियान के बाद सरकार पर बूस्टर डोज के चलते कोई दाग लगे। यही वजह है कि उन्होंने न सिर्फ बूस्टर डोज के अभियान को शुरू करने बल्कि, 15 से 18 आयु वर्ग के लिए टीकाकरण की भी घोषणा कर दी।
छठवीं वजह, अगले साल यूपी सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस बार सरकार ऐसी कोई गलती नहीं करना चाहती जिसके चलते चुनाव से पहले सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल बने। यही वजह है कि मोदी ने अपने संबोधन में ओमिक्रॉन (Omicron) की भयावहता या लॉकडाउन (Lockdown) जैसे शब्द का प्रयोग बिलकुल नहीं किया। उन्होंने सावधानी बरतने, मास्क पहनने, हाथ धुलने जैसे उपायों का तो जिक्र किया लेकिन, भीड़भाड़ से बचने या सोशल डिस्टेंसिंग का जिक्र नहीं किया। यानी, बड़ी सफाई से यह संदेश भी दे दिया कि रैलियां जारी रहेंगी।
सातवीं वजह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) यह बात अच्छी तरह से समझते हैं कि किसी मुद्दे पर उनके बोलने भर से देश भर में चर्चा शुरू हो जाती है और आम लोग उसे गंभीरता से लेते हैं। इसलिए, वह खुद सामने आए और लोगों को आगाह किया कि कोरोना अभी गया नहीं है। हमें सतर्क रहना होगा और सावधानी बरतनी होगी। मोदी का यह संदेश आम जनता को यह बताने के लिए काफी है कि कोरोना नये रूप में वापस आ गया है।
आठवीं वजह, प्रधानमंत्री किसी भी अभियान या मौके को यादगार बनाने का तरीका खोज निकालने में माहिर हैं। कोरोना (Coronavirus) की पहली लहर से पहले दिए जलाने से लेकर थाली पीटने जैसे सांकेतिक कदमों ने उस दौर को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। यह अलग बात है कि इसकी खूब आलोचना भी हुई। इस बार भी उन्होंने क्रिसमस (Christmas) और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के जन्मदिन जैसे मौके को चुना ताकि, इस ऐतिहासिक दिन के साथ बूस्टर डोज और बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान की घोषणा को आसानी से यादगार बनाया जा सके।
बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान, बूस्टर डोज (Booster Dose) की शुरुआत और महामारी (Pandemic) से निपटने की तैयारी के सरकारी दावों की असली परीक्षा तो आने वाले वक्त में ही होगी। लेकिन, प्रधानमंत्री का यह कहना बिलकुल सही है कि इस महामारी (Pandemic) से निपटने में व्यक्तिगत प्रयास और टीका ही दो सबसे बड़े हथियार हैं। तो, नये साल (New Year) के स्वागत के लिए तैयार रहिए लेकिन, ध्यान रखिए कि ओमिक्रॉन (Omicron) भी मौके की ताक में हमारे अगल-बगल ही घूम रहा है।