विज्ञापन
फिटमेंट फैक्टर एक तरह का गणितीय गुणक होता है। इसका इस्तेमाल वेतन आयोग पुराने वेतन को नए वेतन ढांचे में बदलने के लिए करता है। जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है तो मौजूदा बेसिक सैलरी को तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है।

देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई है। हर कोई यही जानना चाहता है कि नई सैलरी कितनी बढ़ सकती है और फिटमेंट फैक्टर का उनकी जेब पर कितना असर पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया से लेकर कर्मचारी संगठनों तक इसी बात की चर्चा हो रही है कि सरकार अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ाती है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। दरअसल, 8वें वेतन आयोग में सबसे अहम भूमिका फिटमेंट फैक्टर की मानी जा रही है। यही वह फॉर्मूला है जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। आसान शब्दों में समझें तो फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा नई बेसिक सैलरी उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन लगातार इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
फिटमेंट फैक्टर एक तरह का गणितीय गुणक होता है। इसका इस्तेमाल वेतन आयोग पुराने वेतन को नए वेतन ढांचे में बदलने के लिए करता है। जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है तो मौजूदा बेसिक सैलरी को तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है। यह तरीका इसलिए भी आसान माना जाता है क्योंकि इससे हर कर्मचारी अपनी संभावित नई सैलरी का अनुमान खुद लगा सकता है। पहले वेतन बढ़ाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती थी लेकिन अब फिटमेंट फैक्टर के जरिए पूरा गणित आसान हो गया है।
नई बेसिक सैलरी निकालने का तरीका बेहद सरल है। इसके लिए आपकी मौजूदा बेसिक पे को फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है और सरकार 2.28 का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है तो नई बेसिक सैलरी करीब ₹41,040 हो सकती है। वहीं अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो यही सैलरी बढ़कर लगभग ₹68,940 तक पहुंच सकती है। इसी तरह अलग-अलग पे ग्रेड वाले कर्मचारियों की सैलरी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में काफी उत्साह बना हुआ है।
हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर फिटमेंट फैक्टर तय नहीं किया है लेकिन कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह 2.28 से 3.83 के बीच हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो लाखों कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। लेवल-10 अधिकारी ग्रेड की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹56,100 मानी जाए तो 2.28 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से यह करीब ₹1.27 लाख तक पहुंच सकती है। वहीं 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह ₹2 लाख से ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि यह केवल बेसिक सैलरी का अनुमान है। इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और दूसरे अलाउंस अलग से जुड़ते हैं जिससे कुल सैलरी और ज्यादा बढ़ जाती है।
आज जिस फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है, पहले ऐसा सिस्टम नहीं था। शुरुआती वेतन आयोगों में सैलरी तय करने का तरीका काफी अलग और जटिल हुआ करता था। उस समय पूरे वेतन ढांचे में बदलाव करके नई सैलरी तय की जाती थी। धीरे-धीरे वेतन प्रणाली को आसान बनाने के लिए फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल शुरू किया गया। इससे कर्मचारियों के लिए यह समझना आसान हो गया कि उनकी नई सैलरी कितनी हो सकती है।
8वें वेतन आयोग को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे देश के करोड़ों लोगों पर सीधा असर पड़ेगा। केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके परिवार सभी इस बदलाव का फायदा उठाएंगे। वेतन आयोग आमतौर पर हर 10 साल में लागू होता है इसलिए इसका असर लंबे समय तक रहता है। यही वजह है कि फिटमेंट फैक्टर को लेकर हर कर्मचारी की दिलचस्पी बढ़ी हुई है।
महंगाई लगातार बढ़ रही है और रोजमर्रा के खर्च पहले से ज्यादा हो चुके हैं। ऐसे में कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस बार ऐसा फिटमेंट फैक्टर लागू करे जिससे उनकी आय में अच्छा खासा इजाफा हो सके। कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय को देखते हुए सिर्फ मामूली बढ़ोतरी काफी नहीं होगी। उनका मानना है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बेहतर फिटमेंट फैक्टर जरूरी है। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। जैसे ही 8वें वेतन आयोग को लेकर आधिकारिक घोषणा होगी लाखों कर्मचारियों की नई सैलरी का पूरा गणित साफ हो जाएगा।
विज्ञापन