बच्चे के दावे पर घिरे लालू के लाल, अनुष्का वाले मामले में मचा है बवाल

हालांकि, तेजप्रताप यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इन खबरों को अफवाह बताते हुए सिरे से खारिज किया और अनुष्का से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार कर दिया। मामला इसलिए संवेदनशील हो गया है क्योंकि तेजप्रताप यादव अभी कानूनन विवाहित बताए जाते हैं उनका पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक का केस अदालत में लंबित है।

फिर विवादों में है लालू के लाल तेजप्रताप यादव
फिर विवादों में है लालू के लाल तेजप्रताप यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Feb 2026 10:56 AM
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Bihar News : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनके कथित प्रेम-रिश्ते को लेकर नई चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि उनकी कथित गर्लफ्रेंड बताई जा रहीं अनुष्का यादव ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है। हालांकि, तेजप्रताप यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इन खबरों को अफवाह बताते हुए सिरे से खारिज किया और अनुष्का से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार कर दिया। मामला इसलिए संवेदनशील हो गया है क्योंकि तेजप्रताप यादव अभी कानूनन विवाहित बताए जाते हैं उनका पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक का केस अदालत में लंबित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि दूसरी शादी या बिना तलाक परिवार बसाने जैसी कोई बात साबित होती है, तो कानून की नजर में क्या परिणाम हो सकते हैं? हिंदू मैरिज एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) इस बारे में क्या कहती है ? आइए इसे समझते हैं।

अंतिम फैसले तक विवाहित ही माने जाएंगे तेजप्रताप

तेजप्रताप यादव की शादी वर्ष 2018 में ऐश्वर्या राय से हुई थी। ऐश्वर्या राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा राय की पोती और वरिष्ठ नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं। शादी के कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच मतभेदों की खबरें सामने आने लगीं और तेजप्रताप ने उसी साल तलाक की अर्जी कोर्ट में दाखिल कर दी। बताया जा रहा है कि 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, यानी कानूनी दृष्टि से तेजप्रताप अब भी शादीशुदा माने जाएंगे जब तक अदालत से तलाक का अंतिम आदेश नहीं आ जाता।

अनुष्का यादव विवाद

चुनावी साल 2025 में तेजप्रताप का नाम पहली बार अनुष्का यादव के साथ जोड़कर देखा गया। सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुईं और दावा हुआ कि तेजप्रताप ने कथित रूप से गुपचुप शादी कर ली है। वायरल तस्वीरों में अनुष्का को नवविवाहित महिला के रूप में पेश किया गया। इसी दौरान तेजप्रताप के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट की भी चर्चा हुई, जिसमें कथित तौर पर 13 साल पुराने रिश्ते का जिक्र बताया गया। बाद में वह पोस्ट हट गया और तेजप्रताप की तरफ से सफाई आई कि अकाउंट हैक हुआ और तस्वीरें AI से बनाई गई हैं। अब 2026 फरवरी में अनुष्का के “मां बनने” की चर्चाओं के बाद तेजप्रताप ने दोबारा स्पष्ट किया है कि अनुष्का से उनका कोई रिश्ता नहीं है। उधर, अनुष्का यादव की ओर से इस पूरे विवाद पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की बात सामने नहीं आई है।

बिना तलाक दूसरी शादी पर क्या सजा?

भारतीय कानून के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की पहली शादी वैध रूप से जारी हो और वह बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ले, तो दूसरी शादी अमान्य (Void) मानी जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत द्विविवाह से जुड़े प्रावधानों में 7 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। Bihar News

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दादा के निधन के बाद बदली सियासी तस्वीर, NCP के उभार ने सबको चौंकाया

नतीजा यह रहा कि अजित पवार गुट की NCP 12 जिला परिषदों में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी और पूरे राज्य में 172 सीटें जीतने में सफल रही। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 225 सीटों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है।

अजित दादा के जाने के बाद बदला चुनावी माहौल
अजित दादा के जाने के बाद बदला चुनावी माहौल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Feb 2026 10:26 AM
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Maharashtra News : महाराष्ट्र के जिला परिषद चुनावों के नतीजों ने ग्रामीण राजनीति का मूड और गठबंधन का गणित दोनों की दिशा पर साफ संकेत दे दिए हैं। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राज्य में बनी सहानुभूति की लहर का सबसे बड़ा फायदा उनके गुट की एनसीपी को मिलता दिखा है। नतीजा यह रहा कि अजित पवार गुट की NCP 12 जिला परिषदों में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी और पूरे राज्य में 172 सीटें जीतने में सफल रही। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 225 सीटों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। चुनावी तस्वीर पर नजर डालें तो एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। कांग्रेस 55 सीटों पर सिमटी, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना 46 सीटें जीत सकी, जबकि शरद पवार गुट (NCP) को राज्यभर में 21 सीटों से संतोष करना पड़ा।

पुणे में NCP का तूफानी प्रदर्शन

पश्चिमी महाराष्ट्र में एनसीपी के पक्ष में सहानुभूति का असर सबसे ज्यादा पुणे में नजर आया। पुणे जिला परिषद की 73 सीटों में से अजित पवार गुट ने 51 सीटों पर कब्जा जमाकर अपना दबदबा बढ़ाया। पिछली बार पार्टी का आंकड़ा 43 सीटों का था । दूसरी तरफ शरद पवार गुट को सिर्फ 1 सीट मिली, जबकि बीजेपी के खाते में 10 सीटें आईं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान ‘अजित दादा’ को श्रद्धांजलि और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की अपील ने पुणे सहित आसपास के इलाकों में समर्थकों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई।

सतारा में BJP ने बनाई बढ़त

सतारा में तस्वीर अलग रही यहां मुकाबला बेहद करीबी और रणनीतिक रहा। उदयनराजे भोसले और शंभूराजे देसाई के नेतृत्व में बीजेपी ने 23 सीटें जीतकर बढ़त बनाई। शिवसेना (शिंदे गुट) को 13 सीटें मिलीं, जबकि NCP ने 21 सीटें जीतकर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसी बेल्ट में कोल्हापुर ने भी दिलचस्प संकेत दिए। यहां एनसीपी ने अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखते हुए 20 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 14 और बीजेपी को 12 सीटों पर सफलता मिली। यह भी साफ हुआ कि महायुति के साथी दल कई जगह साथ लड़े, लेकिन कई क्षेत्रों में सीधे टकराव ने मुकाबले को और रोचक बना दिया।

सोलापुर में BJP का बड़ा ब्रेकथ्रू

सोलापुर में बीजेपी ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार अपने दम पर जिला परिषद में सत्ता की तरफ मजबूत कदम बढ़ाया। 68 सीटों में से पार्टी ने 38 सीटें जीतकर बढ़त दर्ज की। वहीं सांगली में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी 18 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि बीजेपी को 16 सीटें मिलीं। सांगली में महायुति बनाम महाविकास अघाड़ी की जंग बेहद करीबी रही—महायुति 31 सीटों के साथ एमवीए (30) से सिर्फ एक कदम आगे रही।

चुनाव की सबसे बड़ी कहानी

राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, महाराष्ट्र में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए चुनाव कराए गए। खास बात यह रही कि सत्ताधारी महायुति के सहयोगी BJP, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार गुट की NCP कुछ जिलों में साथ मैदान में उतरे, जबकि कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ भी लड़े। पुणे और सतारा में ज्यादातर सीटों पर दोनों एनसीपी गुटों ने समझदारी के साथ तालमेल दिखाया, लेकिन पुणे में 7 सीटों पर दोनों गुट आमने-सामने भी रहे। यही वजह है कि नतीजों में कहीं गठबंधन की ताकत दिखी, तो कहीं अंदरूनी प्रतिस्पर्धा की धार भी नजर आई। Maharashtra News

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नीमका जेल में बंद आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या, जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

जेल में बंद आतंकवाद के आरोपित अब्दुल रहमान की रविवार देर रात हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच के अनुसार, उसके सिर पर किसी नुकीली वस्तु से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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आतंकवाद के आरोपित अब्दुल रहमान
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar09 Feb 2026 06:44 PM
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Jail Murder : हरियाणा के फरीदाबाद स्थित नीमका जेल में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। जेल में बंद आतंकवाद के आरोपित अब्दुल रहमान की रविवार देर रात हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच के अनुसार, उसके सिर पर किसी नुकीली वस्तु से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि हमला जेल के भीतर ही एक अन्य कैदी द्वारा किया गया। आरोपी कैदी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है, जबकि पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

कौन था अब्दुल रहमान?

अब्दुल रहमान पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप थे। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पहले राम मंदिर पर हमले की साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के दौरान विस्फोटक सामग्री बरामद होने का भी दावा किया गया था। इसी केस के चलते वह नीमका जेल में बंद था।

जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल

जेल के भीतर इस तरह की हिंसक वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जेल के अंदर नुकीली वस्तु कैसे पहुंची और हमला रोकने में सुरक्षा कर्मी क्यों नाकाम रहे। वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब कर चुके हैं। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले और दौरान क्या-क्या हुआ। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है। यह घटना न सिर्फ जेल सुरक्षा पर, बल्कि उच्च-जोखिम कैदियों के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।Jail Murder



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