Advertisement
Advertisement
अंतरराष्ट्रीय बाजार में समुद्री ईंधन की कीमतें तेल बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं। औसतन इसकी कीमत 600 से 800 डॉलर प्रति टन के बीच रहती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 50,000 से 65,000 रुपये प्रति टन बैठती है।

Advertisement
Ship Fuel Consumption: जब भी माइलेज की बात होती है तो आमतौर पर गाड़ियों को किलोमीटर प्रति लीटर के पैमाने पर आंका जाता है। लेकिन समुद्र में हजारों कंटेनर ढोने वाले विशाल जहाजों के लिए गणित बिल्कुल उल्टा हो जाता है। यहां सवाल यह नहीं होता कि जहाज 1 लीटर में कितनी दूरी तय करता है, बल्कि यह कि वह 1 किलोमीटर में कितने लीटर ईंधन जला देता है।
करीब 350 से 400 मीटर लंबे बड़े कंटेनर जहाज प्रति किलोमीटर लगभग 200 से 250 लीटर तक ईंधन खर्च कर सकते हैं। इनकी दैनिक खपत स्पीड और लोड के अनुसार 150 से 250 टन तक पहुंच जाती है। आमतौर पर ये जहाज 20 से 24 नॉट (लगभग 37 से 44 किमी/घंटा) की क्रूजिंग स्पीड से चलते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पीड में हल्की सी बढ़ोतरी भी ईंधन खपत को काफी बढ़ा देती है। यही वजह है कि शिपिंग कंपनियां लागत कम रखने के लिए नियंत्रित रफ्तार बनाए रखती हैं।
साधारण गाड़ियों की तरह पेट्रोल या डीजल नहीं, बल्कि बड़े समुद्री जहाज ‘बंकर फ्यूल’ का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मुख्य रूप से वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल (VLSFO) या हैवी फ्यूल ऑयल (HFO) शामिल हैं। यह ईंधन सामान्य डीजल से ज्यादा गाढ़ा और भारी होता है और खास समुद्री इंजनों के लिए तैयार किया जाता है।पर्यावरणीय नियम सख्त होने के बाद कई जहाजों ने सल्फर उत्सर्जन कम करने के लिए कम सल्फर वाले ईंधन को अपनाया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में समुद्री ईंधन की कीमतें तेल बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं। औसतन इसकी कीमत 600 से 800 डॉलर प्रति टन के बीच रहती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 50,000 से 65,000 रुपये प्रति टन बैठती है। यदि एक जहाज प्रति किलोमीटर लगभग 250 लीटर ईंधन खर्च करता है, तो मौजूदा कीमतों के आधार पर उसका अनुमानित ईंधन खर्च प्रति किलोमीटर करीब 15,000 से 20,000 रुपये तक हो सकता है।
जहाज की ईंधन खपत स्थिर नहीं होती। कार्गो का वजन, जहाज का आकार, समुद्री मौसम और स्पीड जैसे कारक इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। पूरी तरह लदा हुआ जहाज इंजन पर ज्यादा दबाव डालता है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। स्पष्ट है कि समुद्री व्यापार की रीढ़ माने जाने वाले ये विशाल जहाज न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि इनके संचालन में ईंधन लागत एक अहम भूमिका निभाती है। Ship Fuel Consumption
Advertisement
Advertisement