केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की ओर से उन्हें एनडीए के घटक दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) में शामिल होने का न्योता दिए जाने के बाद दीपके ने इस पेशकश पर सीधे तौर पर हामी भरने के बजाय तंज के जरिए प्रतिक्रिया दी है।

Abhijeet Deepke : दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बाद चर्चा में आए अभिजीत दीपके को लेकर अब सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की ओर से उन्हें एनडीए के घटक दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) में शामिल होने का न्योता दिए जाने के बाद दीपके ने इस पेशकश पर सीधे तौर पर हामी भरने के बजाय तंज के जरिए प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कुछ समय पहले तक उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ कहा जा रहा था, तो अब अचानक गठबंधन में शामिल होने का न्योता क्यों दिया जा रहा है? दीपके ने एनडीए की ओर से मिले न्योते से जुड़ी एक खबर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की। इसके साथ उन्होंने लिखा, “पर अभी एक महीने पहले तो मैं एंटी-नेशनल था तुम्हारे लिए?” उनकी इस टिप्पणी को हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर व्यंग्य के तौर पर देखा जा रहा है। Abhijeet Deepke
अभिजीत दीपके हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के कारण सुर्खियों में आए थे। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्रों के प्रदर्शन की अगुवाई की थी। आंदोलन का मुख्य मुद्दा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल थे। कई दिनों तक चले इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया। आंदोलन के दौरान दीपके और उनके संगठन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। दीपके का दावा रहा है कि आंदोलन के जरिए छात्रों की आवाज को सरकार तक मजबूती से पहुंचाया गया।
इसी आंदोलन के बाद दीपके की राजनीतिक सक्रियता और उनके संगठन की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी है। Abhijeet Deepke
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने हाल ही में अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने दीपके की सक्रियता और आंदोलन के दौरान उनके नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्हें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने और समाज के लिए काम करने के उद्देश्य से आरपीआई (आठवले) के साथ जुड़ने पर विचार करना चाहिए। आठवले ने कहा था कि दीपके युवा हैं और सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन के दौरान उनके प्रयासों की सराहना भी की और कहा कि उनके अनुभव का उपयोग पार्टी के संगठन को मजबूत करने में किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि दीपके को अरविंद केजरीवाल के साथ रहने के बजाय रिपब्लिकन पार्टी की टीम के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के मौजूदा स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अलग से पार्टी चलाने के बजाय उन्हें आरपीआई के साथ जुड़कर काम करना चाहिए। आठवले की पेशकश पर दीपके का जवाब राजनीतिक रूप से काफी दिलचस्प माना जा रहा है। उन्होंने अपने छोटे से सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे सवाल उठाने के बजाय पुराने घटनाक्रम की याद दिलाई। दीपके ने संकेत दिया कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान उन्हें और उनके साथियों को लेकर सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से तीखी टिप्पणियां की गई थीं। इसी दौरान उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ जैसे तमगे दिए जाने का दावा भी सामने आया था। अब वही राजनीतिक खेमे का एक वरिष्ठ नेता उन्हें अपने साथ आने का न्योता दे रहा है। इसी विरोधाभास को दीपके ने अपने तंज में सामने रखा है। उनका संदेश यह है कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलते ही किसी व्यक्ति को देखने का नजरिया भी बदल सकता है। Abhijeet Deepke
जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन एक महीने से अधिक समय तक चला था। आंदोलन के दौरान पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। आंदोलन के बाद दीपके और सीजेपी ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया। संगठन की ओर से दावा किया गया कि छात्रों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने में आंदोलन सफल रहा। इसी दौरान शिक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई। हालांकि आंदोलन और उसके परिणामों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की अपनी-अपनी व्याख्या रही है। Abhijeet Deepke
अभिजीत दीपके के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। हालांकि वह पहले कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी फिलहाल चुनावी राजनीति में सीधे उतरने की तैयारी नहीं कर रही है। दीपके के मुताबिक, सीजेपी अभी एक ‘प्रेशर ग्रुप’ यानी दबाव समूह के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य चुनाव लड़ने के बजाय देश और समाज से जुड़े मुद्दों को उठाना तथा सरकारों पर जनहित में कार्रवाई के लिए दबाव बनाना है। सीजेपी ने हाल ही में महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत भी की है। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों से जुड़े बुनियादी मुद्दों को सामने लाना बताया गया है। Abhijeet Deepke
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