
Adani Group Case : हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी ग्रुप के लिए हर नई सुबह बुरी खबरें साथ लेकर आती है। शेयर बाजार में धराशाही होने के बाद अब अडानी समूह की संपत्तियां भी खतरे में आ गई हैं। चेन्नई में कंपनी के आयल स्टोरेज, टैंक और पाइप लाइन को ध्वस्त कर दिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी के फैसले पर मोहर लगाते हुए इस काम को छह माह में पूरा करने का समय दिया है। आइए बताते हैं पूरा मामला...
चेन्नई पोट से चार किलोमीटर दूर केटीवी आयल मिल्स और केटीवी फूड्स नामक कंपनियों ने केटीवी पाइप लाइन और टैंक का निर्माण किया था। ये दोनों कंपनियां केटीवी ग्रुप और अडानी विल्मर के संयुक्त प्रयास से काम कर रही हैं। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक, काम शुरु करने से पहले अडानी ग्रुप ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से कोस्टल रेगुलेशन जोन का क्लियरेंस नहीं लिया था। इसके खिलाफ मछुआरों के एक एनजीओ ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी में शिकायत की थी।
रेगुलेशन के मुताबिक, तेल को स्टोर करने का काम नोटिफाइड क्षेत्र में ही होना चाहिए। यानि कि इस काम को समुद्र तटीय इलाकों के पास ही होना चाहिए, लेकिन इसमें नियमों का पालन नहीं किया गया, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय ने अडानी की इस कंपनी को स्थापित करने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया।
आपको बता दें कि इस मामले में एनजीटी ने 30 सितंबर 2020 को फैसला सुनाया था। एनजीटी ने प्रोजेक्ट को रद्द करते हुए कहा था कि प्रोजेक्ट शुरु होने के बाद उसे मंजूरी देना गैरकानूनी है। इसमें नियम कायदों की गलत व्याख्या की गई है। एनजीटी ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय को प्रोजेक्ट मंजूर करने की सलाह नहीं देनी चाहिए थी। इसके साथ एनजीटी ने कंपनी 25 लाख का जुर्माना लगाते हुए 3 माह में जगह खाली करने का आदेश दिया। तमिलनाडु कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथारटी को कहा गया कि कंपनी ऐसा नहीं करती है तो वो खुद जगह खाली करवाए।