लंबे इंतज़ार के बाद 30 जून से एक बार फिर खुलेगा स्वर्ग का रास्ता
Kailash Mansarovar Yatra
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 05:25 PM
Kailash Mansarovar Yatra : कैलाश मानसरोवर यात्रा का नाम अपने जरूर सुना होगा । कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025 से शुरू होने की तारीख नजदीक आ गई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा 30 जून 2025 से प्रारंभ हो रही है । भगवान शिवा का एक नाम कैलाशपति भी हैं । कैलाशपति के नाम पर ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का नाम रखा गया हैं।
पांच साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर से भगवान शिव के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आपको बता दें कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल फिर से शुरू हो रही है अब भारत सरकार के प्रयासों के बाद इस पवित्र यात्रा की शुरुआत 30 जून 2025 से लेकर अगस्त 2025 तक चलेगी। बता दें की कोरोना महामारी की वजह से यह यात्रा 2020 से बंद कर दी गई थी, लेकिन अब इसे बड़े पैमाने पर और बेहतर व्यवस्था के साथ फिर से शुरू किया जा रहा है। इस बार यात्रा का रास्ता टनकपुर से चंपावत होते हुए लिपुलेख पास तक तय किया गया है। पहले यह यात्रा काठगोदाम और अल्मोड़ा होकर जाती थी। हाल ही में विदेश मंत्रालय की एक बैठक में यात्रा को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया गया। इससे हजारों भक्तों की आस्था को एक नया जीवन मिला है।
क्या कहता है कैलाश मानसरोवर यात्रा का इतिहास ?
सनातन धर्म के मान्यताओं के अनुसार सनातन धर्म में कैलाश मानसरोवर की एक विशेष मान्यता हैं । कैलाश मानसरोवर पवित्र यात्रा सदियों से चली आ रही है, जिसमें भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और पवित्र झील में स्नान करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों के लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहां जाता है कि भगवान कुबेर की नगरी भी इसी के पास स्थित थी और यही से महाविष्णु के कर - कमल से निकलकर मां गंगा कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है जहां से भगवान शिव उन्हें अपनी जटाओं में भर धरती की निर्मल धारा की तरफ प्रवाहित करते हैं।
क्या हैं कैलाश मानसरोवर यात्रा की मान्यताएं ?
कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का घर माना जाता है। यह पर्वत बहुत पवित्र है और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। तिब्बती परंपरा में इसे डेमचोक नामक देवता का निवास स्थान माना जाता है। जैन धर्म के अनुसार, पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने यहीं मोक्ष प्राप्त किया था।
कैलाश पर्वत के पास स्थित मानसरोवर झील को भी बहुत पवित्र माना जाता है। यह झील हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। मान्यता है कि इस झील में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति मिलती है। कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, जैन, बौद्ध और तिब्बती धर्मों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा है।
क्यों बंद हुई थी कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा ?
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2020 में कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर तनाव की वजह से पवित्र यात्रा रोक दी गई । दअरसल गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई थी। जिस के कारण मानसरोवर की यात्रा बंद कर दी गई थी । लेकिन अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई जिससे रिश्ते बेहतर हुए। दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख के विवादित इलाकों से सेना हटाने और सामान्य गश्त शुरू करने पर सहमति जताई। भारत ने इस तीर्थयात्रा को दोबारा शुरू करने का मुद्दा लगातार चीन के सामने उठाया। नवंबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 सम्मेलन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से इस पर चर्चा की। इसके बाद दिसंबर और जनवरी में हुई बैठकों में भी यह मुद्दा उठा। Kailash Mansarovar Yatra
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