
Agra News: प्रसिद्ध कवि डॉ. कुँवर बेचैन का एक शेर आपने जरूर सुना होगा कि शाख से तोड़े गए फूल ने हँसकर ये कहा, अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में। कुछ ऐसा ही आगरा के उस ढाई वर्षीय मासूम मयंक ने भी सोचा होगा जिसे एक मजदूर ने सिर्फ इसलिए अगवा कर लिया कि बच्चा उसे अच्छा लगता था।
जी हां, आगरा के सत्यम नगर निवासी जयप्रकाश और मिथिलेश के ढाई वर्षीय बेटे मयंक का विगत दिवस उस समय अपहरण कर लिया गया था जब वह घर के बाहर खेल रहा था। आगरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रात ढाई बजे वृंदावन से अपहरणकर्ता मौसिम को गिरफ्तार करके मयंक को रिहा करा लिया।
जब पुलिस ने मौसिम से अपहरण का उद्देश्य पूछा तो उसने कहा कि उसे य़ह बच्चा अच्छा लगता है। लेकिन पुलिस उसके इस दावे पर विश्वास नहीं कर रही है।
पुलिस का दावा है कि वह मयंक को भिखारियों के एक गिरोह को बेचने वाला था। पुलिस आरोपी से गहनता से पूछताछ कर रही है।