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सोयाबीन के लाभ:
सोयाबीन में कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जो इसे एंटी डायबिटिक भोजन बनाता है। सोयाबीन को आहार में शामिल करने से यह खून में शर्करा स्तर नियंत्रित रखने में सहायक होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए फोलिक अम्ल और विटामिन 'बी कॉम्प्लेक्सÓ बहुत आवश्यक है। सोयाबीन इनका समृद्ध स्रोत है। सोयाबीन में आयरन, कॉपर, जिंक, सेलिनियम, कॉपर, मैग्नीशियम और कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है, जो इसे खून से संबंधित रोगों, हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने, नींद के अन्य रोगों के साथ-साथ अनिद्रा को कम करने में मदद करता है। सोयाबीन में फाइबर होने से यह पाचन तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सोयाबीन में आइसोफ्लेवोन्स प्रचुर मात्रा में होता है, जो प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए असंतृप्त वसा मदद कर सकती है।
खेत की तैयारी एवं मृदा:
2-3 जुलाई के बाद पाटा चलाकर जमीन को समतल कर लें। हल्की दोमट मृदा, जिसमें जल निकासी की सुविधा हो एवं पर्याप्त मात्रा में जीवांश पदार्थ हो उपयुक्त रहती है।
उन्नत प्रभेद:
बिरसा सोयाबीन-1 एन. आर. सी. 7. एन.आर.सी.-37. जे. एस. 335. जे. एस. -9305. अलंकार, इंदिरा सोया-1 इंदिरा सोया-91
बीज दर, बुआई का समय और बीजोपचार:
सोयाबीन के लिए बीज दर, छोटा 60-65 ग्राम/ हैक्टर मध्यम 70-75 ग्राम/हैक्टर और मोटा दाना 80-100 ग्राम/हैक्टर की आवश्यकता होती है। बीज की बुआई के लिए 25 जून से 15 जुलाई तक का समय सर्वोत्तम है। बीजजनित रोगों से बचाव के लिए थीरम या बाविस्टीन 2.0 ग्राम/कि.ग्रा. बीज को उपचारित करें। बेहतर नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए राइजोबियम कल्चर 20 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें।
बुआई की विधि:
सोयाबीन की बुआई सीडडिल या हल द्वारा पंक्ति से पंक्ति 45 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 5-7 में मो. में करनी चाहिए। संरक्षण खेती में बिना जुताई के बीज की सीधी बुआई जोरोटिल दिल या हैप्पीसोडर मशीन द्वारा करनी चाहिए।
सारणी 1. सोयाबीन का पोषण मूल्य (100 ग्रम)
ऊर्जा 416 किलो कैलोरी
प्रोटीन 36.5 ग्राम
कुल वसा 19.9 ग्राम
संतृप्त वसा अम्ल 2.9 ग्राम
मोनोसैचुरेटेड वसा अम्ल 4.4 ग्राम
पॉलीअनसैचुरेटेड वसा अम्ल 11.3 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट 30.2 ग्राम
फाइबर 9.3 ग्राम
कैल्शियम 277 मि.ग्रा.
आयरन 15.7 मि.ग्रा.
मैग्नीशियम 280 मि.ग्रा.
फॉस्फोरस 704 मि.ग्रा.
पोटेशियम 1797 मि.ग्रा.
सोडियम 2.0 मि.ग्रा.
जिंक 4.9 मि.ग्रा.
कॉपर 1.7 मि.ग्रा.
मैंगनीज 2.52 मि.ग्रा.
पोषक तत्व प्रबंधन:
20, 80, 40, 25 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, गंधक / हैक्टर की दर से मृदा बुआई के समय अच्छी तरह से में मिलाना चाहिए।
खरपतवार प्रबंधन:
शुरू के 30-45 दिन खरपतवार के लिए संवेदनशील होते हैं। फसल बुआई के बाद एवं अंकुरण से पहले पेण्डामिथलीन 30 प्रतिशत ई.सी. 1000 ग्राम/ हैक्टर सक्रिय तत्व को 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
सिंचाई प्रबंधन:
खरीफ मौसम होने के कारण सामान्यत: सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, परन्तु पौधावस्था, पुष्पावस्था एवं फली में दाना भरने की अवस्था पर सूखे की स्थिति में सिंचाई अवश्य करनी चाहिए।
पौध संरक्षण:
पीला मोजेक रोग से बचाव के लिए मिथाइल डीमैटोन 25 ई.सी. 0.8 लीटर / हैक्टर और थिऑमेथोक्सम / 100 ग्राम/हैक्टर की दर से छिड़काव करें। रतुआ रोग प्रभावित क्षेत्र में हैक्साकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल और ट्रायडीमेफोन 0.8 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से रोगनिरोधक के तौर पर प्रयोग करें। पत्तीजनित रोगों के लिए कार्बेन्डाजिम और थिओफिनेट मिथाइल / 0.5 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से छिड़काव बुआई के 35 दिनों और 50 दिनों के अंतराल पर करें।
निष्पत्रक कीटों से बचाव के लिए सूक्ष्मजीवी कीटनाशक (डिपेल/बायोबिट/ डिस्पेल) से एक छिड़काव के 15 दिनों बाद इंडोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. 33 मि.ली. दवा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
फसल कटाई और गहाई:
जब सोयाबीन की पत्तियां पीली तथा फलियां भूरे रंग की हो जाएं, तो फसल को काट लेना चाहिए। कटाई के बाद 4-5 दिनों तक खेत में सूखने दें, ताकि दानों में नमी 13-14 प्रतिशत रह जाए। इसके बाद फलियों की गहाई कर लेनी चाहिए। फसल गहाई थ्रेसर, ट्रैक्टर, बैलों तथा हाथ द्वारा लकड़ी से पीटकर कर सकते हैं।
फसल भंडारण:
गहाई के उपरांत दानों को 2-3 दिनों तक धूप में सुखाकर, जब दानों में नमी 10 प्रतिशत हो, तो भण्डारण कर लें।
फसल उत्पादन:
18-20 क्विंटल/ हैक्टर
मुनाफा:
40, 000 से 50,000 रुपये/ हैक्टर
मांस और दूध की तुलना में सोयाबीन प्रति एकड़ 5-15 गुना अधिक प्रोटीन उत्पादन करता है। अगर मनुष्य की प्रोटीन की जरूरतें पशुओं की बजाय सोया खाद्य से पूरी की जाये तो में सिर्फ वनों की कटाई में कमी आएगी बल्कि एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाये रखने में मदद मिलेगी और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में भी कमी आएगी।