Amaravati : दुष्कर्म के मामलों में यौन उत्पीड़न साबित करने के लिए वीर्य स्खलन जरूरी नहीं : हाईकोर्ट
Ejaculation not necessary to prove sexual assault in rape cases: High Court
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:20 PM
अमरावती। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की सजा का बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न को साबित करने के लिए वीर्य का स्खलन आवश्यक शर्त नहीं है।
रिकार्ड पर मौजूद साक्ष्य अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त
न्यायमूर्ति चीकती मानवेंद्र नाथ रॉय ने कहा कि अगर रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य से पता चलता है कि यौन संबंध बनाया गया था, तो यह पॉक्सो अधिनियम की धारा तीन के तहत पारिभाषित यौन उत्पीड़न के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त है। न्यायमूर्ति रॉय ने 22 पृष्ठों के फैसले में कहा कि जब 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाए जाते हैं तो यह पोक्सो कानून की धारा 5(एम) के तहत यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है तथा धारा छह में दोषी के लिए सजा का प्रावधान है।
निचली अदालत ने दी थी 10 साल के कठोर कारावास की सजा
वर्ष 2015 में एक नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करने के दोषी व्यक्ति को 2016 में पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु में एक विशेष न्यायाधीश द्वारा 10 साल के कठोर कारावास तथा 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। बाद में, दोषी व्यक्ति ने डॉक्टर की रिपोर्ट का सहारा लेते हुए अपनी सजा को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाने का कोई सबूत नहीं था, क्योंकि परीक्षण के समय वीर्य की मौजूदगी का पता नहीं चला था। न्यायमूर्ति रॉय ने हालांकि कहा कि डॉक्टर ने जो अन्य ब्योरे दिए, उनसे साफ संकेत मिलता है कि पीड़िता का यौन उत्पीड़न हुआ था।
देश विदेशकी खबरों से अपडेट रहने लिएचेतना मंचके साथ जुड़े रहें।देश–दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमेंफेसबुकपर लाइक करें याट्विटरपर फॉलो करें।