
दरअसल, रेलवे ठेकेदारों की देशव्यापी संस्था ‘इरिपा’ के पूर्व अध्यक्ष और बीएम कंस्ट्रक्शन कंपनी के एमडी स्व. बालकिशन शर्मा विजय नगर को पुराने शहर से जोड़ने वाले धोबीघाट पुल (Dhobighat Bridge) का निर्माण करा रहे थे। पिछले साल 11 मई को श्री शर्मा का कोरोना से निधन हो गया। पिछले दिनों रात को आरओबी के लिये ब्लॉक की तैयारी की जा रही थी, तभी कुछ गुंडा टाइप के लोगों ने पुल का काम कर रहे कारीगरों और इंजीनियरों को धमकाया और कहा कि तुम्हारी कंपनी के मालिक की ओर से अशोक शर्मा को 10 लाख रुपए नहीं दिये गए तो काम नहीं होने दिया जाएगा। यही नहीं, अशोक शर्मा ने फोन करके खुद भी स्व. बालकिशन शर्मा की धर्मपत्नी अंजना शर्मा को धमकाया। जब उन्होंने मांग मानने से इनकार कर दिया तो उसने कविनगर पुलिस थाने में झूठी शिकायत दर्ज करा दी। हैरत की बात यह है कि पुलिस ने एक साल पहले स्वर्गवासी हो चुके बालकिशन शर्मा के खिलाफ मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कर लिया। रिपोर्ट के अंत में अशोक शर्मा ने स्व. बालकिशन शर्मा के कारोबार को संभाल रहे उनके पुत्र को भी धमकाने के आरोप में नामजद करा दिया।
जब शर्मा परिवार को रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मिली तो स्व. बालकिशन शर्मा की धर्मपत्नी अंजना शर्मा कुछ साथी वकीलों के साथ कविनगर थाने पहुंचीं और अशोक शर्मा से आमने-सामने कराने की मांग की। पुलिस ने अशोक शर्मा को बुला लिया, जिसने मौके पर अंजना शर्मा को नहीं पहचाना। पुलिस के सामने उसने यह भी मान लिया कि सूर्यांश शर्मा को भी उसने कभी नहीं देखा है। हालांकि कुछ कागजात दिखाकर उसने यह जरूर बताने की कोशिश की कि स्व. बालकिशन शर्मा के ऊपर उसके 10 लाख रुपए बकाया हैं। जवाब में अंजना शर्मा ने पुलिस को कुछ ऐसे कागजात दिखाए, जिनके आधार पर पुलिस ने ही माना कि अशोक शर्मा झूठ बोल रहा है। इस दौरान मौके पर अशोक शर्मा के साथ पटेलनगर निवासी भाजपा नेता अशोक चौधरी (BJP Leader Ashok Chaudhary) और अपने आप को मुख्यमंत्री का खास आदमी बताने वाला एक अज्ञात कथित भाजपा नेता भी था।
हैरत की बात यह है कि बावजूद इसके पुलिस ने अंजना शर्मा की ओर से पेश रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस की ओर से रिपोर्ट दर्ज करने और अशोक शर्मा को सबक सिखाने का भरोसा जरूर दिया जाता रहा, लेकिन कानूनी तौर पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस के इस रवैये का फायदा उठाकर वसूली माफिया की ओर से धमकियों का सिलसिला और बढ़ गया। उसके पैरोकार कथित नेता भी रुपए देने का दवाब बनाने लगे। उन्होंने धमकी दी कि अगर रुपए नहीं दिये तो धोबीघाट पुल नहीं बनने देंगे, वे मुख्यमंत्री से कहकर इसका निर्माण रुकवा देंगे। थक-हारकर अंजना शर्मा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दी। सीजेएम ने पूरी सुनवाई के बाद कविनगर थाना प्रभारी को अंजना शर्मा की शिकायत पर एफआईआर तत्काल दर्ज करने और विवेचना कर न्याय करने के आदेश जारी कर दिये।