
Ambergris : महाराष्ट्र के सांगली शहर में पुलिस ने 5.5 करोड़ रुपये का ‘एम्बरग्रीस’ रखने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आखिर एम्बरग्रीस क्या होता है और इसको रखने पर प्रतिबंध क्यों ह़ै? आपको बता दें कि समुद्र में एक ऐसी मछली पाई जाती है, जो बेहद ही दुर्लभ होती है। इस मछली की आंत की कीमत करोड़ों रूपयों में होती है। वन्य जीव अधिनियम के तहत इस पर कई तरह की पाबंदियां भी हैं।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, व्हेल मछली की आंतों में एम्बरग्रीस पाया जाता है। यह बेहद ही सुगंधित होती है। इसकी खुशबू इत्र की सुगंध को भी मात देती है । वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत ज्यादातर इत्र बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘एम्बरग्रीस’ की बिक्री करने और उसे रखने पर प्रतिबंध है।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, ‘एम्बरग्रीस’ को उनके एक साथी की मदद से राज्य के तटीय सिंधुदुर्ग जिले के मालवन से लाया गया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इत्र बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘एम्बरग्रीस’ की बिक्री करने और उसे रखने पर प्रतिबंध है।
क्या होता है एम्बरग्रीस :-
फ्रांसीसी शब्द ग्रे एम्बर या एम्बरग्रीस को प्रायः व्हेल की उल्टी (Vomit) के रूप में जाना जाता है।
यह एक ठोस और मोम जैसा पदार्थ है जो स्पर्म व्हेल की आँतों में उत्पन्न होता है।
स्पर्म व्हेल में से केवल 1% ही एम्बरग्रीस का उत्पादन करती हैं।
रासायनिक रूप से एम्बरग्रीस में एल्कलॉइड, एसिड और एंब्रेन नामक एक विशिष्ट यौगिक होता है, जो कोलेस्ट्रॉल के समान होता है।
यह जल निकाय की सतह के चारों ओर तैरता है और कभी-कभी तट के समीप आकर इकठ्ठा हो जाता है।
इसके उच्च मूल्य के कारण इसे तैरता हुआ सोना कहा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में 1 किलो एम्बरग्रीस की कीमत 1 करोड़ रुपये है।
प्रयोग:
इसका इस्तेमाल इत्र बाज़ार में खासतौर पर कस्तूरी जैसी सुगंध विकसित करने के लिये किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि दुबई जैसे देशों में जहाँ इत्र का एक बड़ा बाज़ार है, इसकी अधिक मांग है।
प्राचीन मिस्रवासी इसका प्रयोग धूप (Incense) के रूप में करते थे। ऐसा माना जाता है कि इसका उपयोग
कुछ पारंपरिक औषधियों और मसालों के रूप में भी किया जाता है।
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