भारत की प्राकृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बैरन और नारकोंडम द्वीपों के ज्वालामुखीय भू-दृश्य तथा बाराटांग के कार्स्ट-मड वोल्केनो कॉम्प्लेक्स को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
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National News : अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अनूठी प्राकृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां के दो प्राकृतिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। इनमें बैरन और नारकोंडम द्वीपों के ज्वालामुखी तथा बाराटांग का कार्स्ट-मड वोल्केनो कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। यूनेस्को के विश्व धरोहर केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों स्थलों के प्रस्ताव 28 सितंबर 2026 को भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने जमा किए थे। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल (LG) दिनेश शर्मा ने कहा, "यह खुशी की बात है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया जा रहा है। अंडमान और निकोबार प्रशासन इस बात से बेहद खुश है कि इस केंद्र शासित प्रदेश की अनूठी प्राकृतिक विरासत को पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। National News
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संभावित सूची में शामिल *अंडमान सबडक्शन वोल्केनोज* नामक स्थल में बैरन और नारकोंडम द्वीपों के ज्वालामुखीय भू-दृश्य शामिल हैं। बैरन द्वीप दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है, जबकि नारकोंडम द्वीप अपनी विशिष्ट भूवैज्ञानिक संरचना और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। ये दोनों द्वीप भारतीय प्लेट और बर्मा माइक्रोप्लेट के बीच होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों से जुड़े हैं। इनकी संरचना वैज्ञानिकों को ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं, भू-पर्पटी की हलचल और द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को समझने में मदद करती है। नारकोंडम द्वीप पर पाया जाने वाला नारकोंडम हॉर्नबिल भी इस क्षेत्र की जैव विविधता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह पक्षी इसी द्वीप तक सीमित है। National News
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दूसरा प्रस्तावित स्थल *कार्स्ट-मड वोल्केनो कॉम्प्लेक्स ऑफ बाराटांग* है। इसमें चूना-पत्थर से बनी गुफाएं और कीचड़ उगलने वाले ज्वालामुखी शामिल हैं। बाराटांग द्वीप की ये भूवैज्ञानिक संरचनाएं लाखों वर्षों में हुए प्राकृतिक बदलावों और क्षेत्र की टेक्टोनिक गतिविधियों की कहानी कहती हैं। सामान्य ज्वालामुखियों से अलग, मड वोल्केनो से पिघला हुआ लावा नहीं निकलता। इनके मुहानों से कीचड़, पानी और गैसों का मिश्रण बाहर आता है। इस कारण ये संरचनाएं भूवैज्ञानिक अध्ययन के लिहाज से विशेष महत्व रखती हैं। यह क्षेत्र चूना-पत्थर की गुफाओं, उष्णकटिबंधीय वनस्पतियों और विशिष्ट जीव-जंतुओं के कारण भी महत्वपूर्ण है। यहां की प्राकृतिक संरचनाएं भूविज्ञान और जैव विविधता के बीच संबंधों को समझने में मदद कर सकती हैं। National News
अंडमान और निकोबार प्रशासन ने इन स्थलों के लिए औपचारिक नामांकन दस्तावेज यानी *नॉमिनेशन डोजियर* तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस दस्तावेज में स्थलों के वैश्विक महत्व, संरक्षण की स्थिति, सीमाओं और प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाती है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संभावित सूची में शामिल होने का अर्थ अभी यूनेस्को की अंतिम विश्व धरोहर सूची में जगह मिलना नहीं है। यह नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है। अंतिम दर्जे के लिए प्रस्ताव का विस्तृत मूल्यांकन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। इन दोनों स्थलों का संभावित सूची में शामिल होना अंडमान-निकोबार की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और जिम्मेदार पर्यटन की संभावनाओं को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। National News
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