Anil Ambani: अनिल अंबानी कोई छोटा मोटा नाम नहीं है। अनिल अंबानी (Anil Ambani) भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति स्व. धीरूभाई अंबानी के बेटे तथा दुनिया के टॉप-10 उद्योगपतियों में शामिल मुकेश अंबानी के भाई हैं। इतना शानदार बैकग्राउंड होने के बावजूद अनिल अंबानी पूरी तरह से कंगाल हो चुके हैं। अनिल अंबानी को भारत के प्रतिष्ठित बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने फ्रॉड उद्योगपति बताकर उसके फ्रॉड की शिकायत CBI से कर दी है।
अर्श से फर्श पर आ गए हैं अनिल अंबानी
भारत में प्रसिद्ध मुहावरा है- ‘‘अर्श से फर्श पर’’ भारत का यह प्रसिद्ध मुहावरा अनिल अंबानी के ऊपर सटीक बैठ रहा है। इस मुहावरे का अर्थ है आसमान की ऊंचाई से जमीन पर आ जाना। यही स्थिति अनिल अंबानी के साथ हो गई है। ज्यादा पुरानी बात नहीं है वर्ष-2002 तक अनिल अंबानी का नाम भारत के टॉप उद्योगपतियों में गिना जाता था। वर्तमान में अनिल अंबानी खुद ही NCLT में जाकर बता रहे हैं कि वें दिवालिया (कंगाल) हो चुके हैं। इस बात में अब कोई शक नहीं बचा है कि अनिल अंबानी पूरी तरह से कंगाल हो चुके हैं। यह अलग बात है कि ‘‘बड़े वर्तन की खुरचन भी बड़ी होती है’’ वाली कहावत भी अनिल अंबानी के ऊपर सटीक साबित हो रही है। इस कहावत का मतलब है कि जब कोई बड़ा व्यक्ति कंगाल होता है तो उसके पास इतना धन तो बच ही जाता है जितना धन आम आदमी के पास नहीं होता है।
मात्र 17 साल पहले 42 बिलियन डॉलर थी अनिल अंबानी की नेटवर्थ
यह ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब अनिल अंबानी भारत के टॉप-10 अमीरों में गिने जाते थे। वर्ष-2008 की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2008 में अनिल अंबानी की नेटवर्थ 42 बिलियन डॉलर से भी अधिक की थी। वर्ष-2025 आते-आते अनिल अंबानी कंगाल हो गए हैं। कुछ दिन पहले तक अनिल अंबानी उद्योग जगत में कम बैक की कोशिश कर रहे थे। लगता है कि अब अनिल अंबानी का कम बैक करने का सपना समाप्त हो गया है। ED ने जिस प्रकार अनिल अंबानी को चारों तरफ से घेरा उससे तो लगता है कि अनिल अंबानी का आगे का जीवन कंगाली में ही गुजरने वाला है।
बहुत दिलचस्प है अनिल अंबानी के अर्श तक जाने की यात्रा
बात अनिल अंबानी के इतिहास की करें तो बिजनस की दुनिया में अनिल अंबानी उभार 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब उनके पिता धीरूभाई अंबानी को 1986 में स्ट्रोक हुआ था। अनिल ने रिलायंस के वित्तीय लेन-देन के डे-टु-डे मैनेजमेंट को संभाला। साल 2002 में धीरूभाई की मृत्यु के बाद अनिल और उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी ने संयुक्त रूप से रिलायंस का नेतृत्व किया। हालांकि 2005 में कंट्रोल को लेकर विवादों के कारण भाइयों के बीच विभाजन हो गया। मुकेश के हिस्से में तेल और पेट्रोकेमिकल बिजनस आया जबकि अनिल को टेलिकॉम, पावर और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे नए वेंचर मिले। अनिल अंबानी के इन्फ्रा, रक्षा और मनोरंजन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एंट्री मारी लेकिन उन्हें सीमित सफलता मिली। फिर आया वह समय जब अनिल अंबानी फर्श की तरफ गिरते चले गए। उनको फर्श पर गिराने का सबसे बड़ा श्रेय उत्तर प्रदेश के दादरी में लगाए जाने वाले उनके पॉवर प्रोजेक्ट को जाता है।
यहां आप विस्तार से पढ़ सकते हैं कि कैसे बर्बाद हुए अनिल अंबानी।