अनिल अंबानी की मुसीबत ED की रेड तक खत्म होने वाली नहीं है। ED के सूत्रों ने अनिल अंबानी को लेकर बड़ा दावा किया है। ED के सूत्रों का दावा है कि छापेमारी के दौरान अनिल अंबानी (Anil Ambani) के फ्रॉड का खुलासा हो गया है। ED ने अनिल अंबानी के विरुद्ध अलग-अलग FIR दर्ज कर रखी है। छापेमारी के बाद ED जल्दी ही अनिल अंबानी से पूछताछ करेगी। पूछताछ में अनिल अंबानी पर्याप्त सबूत व जानकारी नहीं दे पाया तो अनिल अंबानी को PMLA के तहत गिरफ्तार किया जाएगा। Anil Ambani
ED की छापेमदारी में मिले हैं बहुत बड़े सबूत
रिलायंस समूह के मालिक अनिल अंबानी के 52 ठिकानों पर ED ने तीन दिन तक छापेमारी की है। ED के सूत्रों का दावा है कि अनिल अंबानी के ठिकानों से बड़े-बड़े सबूत मिले हैं। इन्हीं सबूतों को आधार बनाकर ED आगे की कार्यवाही करेगी। ED के सूत्रों का दावा है कि अनिल अंबानी को PMLA के तहत जेल भी भेजा जा सकता है। छापेमारी से जुड़े ED के सूत्रों का दावा है कि अनिल अंबानी के ठिकानों से उन्हें अनेक प्रकार के सबूत मिले हैं। इन सबूतों के आधार पर अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध ना कराने पर अनिल अंबानी को जेल में भी भेजा जा सकता है। अगले कुछ दिन अनिल अंबानी के भविष्य के बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे।
ED के सूत्रों ने बताया है कि, छापेमारी के दौरान पता चला है कि अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियां सार्वजनिक धन की हेराफेरी और वित्तीय संस्थानों को गुमराह करने के लिए एक सोची-समझी प्लानिंग में शामिल थीं। इसमें कथित तौर पर 2017 और 2019 के बीच यस बैंक से करीब 3,000 करोड़ रुपये के लोन की अवैध रूप से हेराफेरी शामिल थी। अधिकारियों का कहना है कि लोन वितरण से ठीक पहले, यस बैंक के प्रमोटर्स से जुड़ी संस्थाओं को पैसा हासिल हुआ था। इससे बैंक अधिकारियों और उधारकर्ता फर्मों के बीच संभावित रिश्वतखोरी और लेन-देन की व्यवस्था के सवाल उठे हैं। ईडी अब यस बैंक के प्रमोटर्स और अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के बीच कथित सांठगांठ की जांच कर रही है। ED को पता चला है कि यस बैंक के अधिकारी अनिल अंबानी के साथ मिलकर बहुत बड़ी गड़बड़ी कर रहे थे। ईडी के सूत्रों ने बताया कि पिछली तारीख के क्रेडिट अप्रूवल मेमोरेंडम (सीएएम), बिना जांच-पड़ताल या क्रेडिट एनालिसिस के किए गए निवेश, और बैंक की अपनी क्रेडिट पॉलिसी का उल्लंघन करते हुए लिए गए फैसले अनियमितताओं में शामिल हैं। अनिल अंबानी को दिए गए लोन के मामलों में औपचारिक मंजूरी से पहले ही लोन वितरण किया गया और आवेदन जमा होने के दिन ही रकम जारी कर दी गई। कुछ फर्म, जिन्हें रकम मिली है, की वित्तीय स्थिति कथित तौर पर कमजोर थी, उनके पते और डायरेक्टर एक जैसे थे, साथ ही उनके पास उचित दस्तावेजों की कमी थी जिससे शेल कंपनियों और राउंड-ट्रिपिंग का शक बढ़ गया है।
सेबी ने भी ED को दी है गड़बड़ी की जानकारी
अनिल अंबानी की एक प्रमुख कंपनी रिलायंस होम फाइनेंस भी ED की रडार पर है। रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) में भी भारी गड़बड़ी की गई है। बताया जा रहा है कि सेबी ने RHFL की तरफ से दिए गए कॉर्पोरेट लोन में भारी उछाल देखने के बाद अपनी फाइंडिंग ईडी के साथ शेयर की है। क्योंकि कॉर्पोरेट लोन वित्त वर्ष 2017-18 में 3,742.60 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670.80 करोड़ रुपये हो गया। ED इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह उछाल किसी बड़े लोन डायवर्जन प्लान से जुड़ी थी। अनिल अंबानी की कंपनी RHFL की जांच के हिस्से के तौर पर अनियमित और जल्द अप्रूवल, प्रक्रिया उल्लंघन और संबंधित पक्षों को आगे लोन देने को भी उजागर किया गया है।
भारतीय स्टेट बैंक ने अनिल अंबानी को घोषित किया फ्रॉड
आपको बता दें कि, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भारत का सबसे बड़ा बैंक है। SBI ने अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित किया है। SBI के द्वारा अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित करने के बाद ही ED की छापेमारी शुरू हुई है। SBI बैंक ने इस धोखाधड़ी की सूचना RBI को दे दी है। आरकॉम को SBI के लोन में 2,227.64 करोड़ रुपये के फंड-बेस्ड लोन और 786.52 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी शामिल है। कंपनी दिवालिया कार्यवाही से गुजर रही है और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में संसद को सूचित किया कि एसबीआई ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत अनिल अंबानी के खिलाफ भी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही शुरू की है। ED की छापेदारी अनिल अंबानी के 35 से ज्यादा परिसरों, 50 से ज़्यादा कंपनियों के ठिकानों पर हुई और मामले से जुड़े 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई। ये छापे मुंबई और दिल्ली में मारे जा गए हैं और इनमें अनिल अंबानी के व्यावसायिक कार्यों से जुड़े दफ्तर और प्रतिष्ठान शामिल हैं। ED ने अनिल अंबानी के घर की तलाशी अभी तक नहीं की है।