देश का ऐसा राज्य जहां डॉ. कलाम ने देखा भारत का भविष्य
भारत
चेतना मंच
15 Oct 2025 12:13 PM
भारत के 11वें राष्ट्रपति, वैज्ञानिक और लाखों युवाओं के आदर्श डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) का बिहार से एक विशेष जुड़ाव था जो किसी राजनेता जैसा नहीं बल्कि एक सच्चे शिक्षक और मार्गदर्शक जैसा था। जब 2002 में राष्ट्रपति बनने के बाद डॉ. कलाम पहली बार बिहार आए तो उनका स्वागत केवल एक उच्च पदाधिकारी के तौर पर नहीं बल्कि एक मिसाइल मैन और ड्रीम टीचर के रूप में हुआ। छात्रों की भीड़ नारे लगा रही थी "मिसाइल मैन जिंदाबाद"। पटना विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मंच पर खड़े होकर उन्होंने कहा, "यदि बिहार जाग गया तो भारत को कोई रोक नहीं सकता।" APJ Abdul Kalam
बिहार से कलाम का रिश्ता
रामेश्वरम के समुद्र तटों से लेकर बिहार के मैदानों तक डॉ. कलाम का सफर सिर्फ भौगोलिक नहीं था यह विचारों और मूल्यों की यात्रा थी। उन्होंने बिहार को हमेशा एक संभावनाओं की भूमि के रूप में देखा। उनकी यात्राएं औपचारिकताओं से परे होती थीं। चाहे पटना साइंस कॉलेज हो या दरभंगा का कोई स्कूल डॉ. कलाम छात्रों के बीच जाकर बैठते, संवाद करते और उन्हें विज्ञान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ने को प्रेरित करते। वे कहा करते थे, "बिहार केवल अतीत की महिमा नहीं बल्कि भविष्य का ज्ञान–केंद्र बन सकता है।"
नालंदा, विक्रमशिला और ‘ज्ञान पुनर्जागरण’ का सपना
डॉ. कलाम अक्सर नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों का जिक्र करते थे। वे मानते थे कि अगर यह भूमि कभी पूरी दुनिया के लिए शिक्षा का केंद्र रही है तो वह शक्ति आज भी इसमें छिपी है। उन्होंने नालंदा को एक अंतरराष्ट्रीय ज्ञान केंद्र बनाने का सपना देखा था। जब 2010 में नया नालंदा विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया तो उस परियोजना में डॉ. कलाम की सोच की झलक साफ दिखी।
विज्ञान और नवाचार की विरासत
डॉ. कलाम चाहते थे कि विज्ञान सिर्फ प्रयोगशालाओं में नहीं गांवों और स्कूलों तक पहुंचे। इस सोच को साकार करने के लिए पटना में डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी स्थापित हुआ। 398 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अत्याधुनिक केंद्र में 'कलाम गैलरी' विशेष आकर्षण है, जहां उनके जीवन और कार्यों को डिजिटल तकनीक से दर्शाया गया है। यहां बिहार के गांव–कस्बों से हजारों छात्र आते हैं और ‘ज्ञान आधारित समाज’ की अवधारणा को समझते हैं।
किसानों से संवाद
डॉ. कलाम की सोच सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं थी। गया में किसानों से बात करते हुए उन्होंने कहा था, "आपकी जमीन गरीब नहीं है। उसे सिर्फ नई तकनीक और सही मार्गदर्शन की जरूरत है।" उन्होंने सिंचाई, बायोटेक्नोलॉजी और जल प्रबंधन जैसे विषयों पर जोर दिया। आज जब बिहार में कई कृषि स्टार्टअप और तकनीकी किसान समूह उभर रहे हैं तो यह डॉ. कलाम की उसी सोच की परिणति है।
शिक्षा में परिवर्तन की वकालत
2001 की जनगणना में बिहार की साक्षरता दर महज 47% थी। महिलाओं में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक था। डॉ. कलाम ने इसे बदलने की आवश्यकता को बार–बार उठाया। उन्होंने ICT और ई-लर्निंग की वकालत की, जिससे बिहार के दूरदराज के गांवों तक शिक्षा पहुंच सके। बाद में राज्य सरकार ने ई-शिक्षा और ज्ञान भवन जैसी योजनाओं में उनकी कई सिफारिशें अपनाईं।
युवाओं का पलायन और कलाम की उम्मीद
बिहार से हर साल लाखों युवा शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर जाते हैं। इस पर डॉ. कलाम ने कहा था, "यह दुख की बात है कि टैलेंट को घर छोड़ना पड़ता है लेकिन एक दिन यही टैलेंट बिहार लौटकर उसे बदल देगा।" उनका विश्वास आज भी IAS से लेकर इंजीनियरिंग स्टार्टअप तक, हर क्षेत्र में बिहारियों को प्रेरित करता है। पटना साइंस कॉलेज में छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा था, "सिर्फ परीक्षा पास करना आपका लक्ष्य नहीं होना चाहिए, कुछ नया करने की जिज्ञासा बनाए रखिए।" उनकी यह बात इतनी गूंजती रही कि कई संस्थानों में कलाम क्लब’ बनने लगे जो शोध, नवाचार और नेतृत्व के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
डॉ. कलाम की दृष्टि स्पष्ट थी अगर बिहार जागेगा, तो भारत का भविष्य बदलेगा। उन्होंने संसाधनों की कमी को कभी बाधा नहीं माना बल्कि इसे नवाचार और मेहनत से पार करने का रास्ता बताया। “महान सपने देखने वालों के सपने हमेशा पूरे होते हैं।” यह सिर्फ उनकी किताब की पंक्ति नहीं बल्कि एक राज्य के लिए उनका प्यार और विश्वास था। APJ Abdul Kalam