डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जयंती पर योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. महेश शर्मा और विभिन्न राजनीतिक दलों ने मिसाइल मैन को श्रद्धांजलि दी। जानिए उनका प्रेरक जीवन और योगदान।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और देश-दुनिया में ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर गुरुवार, 15 अक्टूबर को देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने डॉ. कलाम के योगदान को नमन किया। डॉ. कलाम की जयंती केवल एक महान वैज्ञानिक को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उस व्यक्तित्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन भी है, जिसने अपनी प्रतिभा, सादगी, राष्ट्रभक्ति और दूरदर्शी सोच से करोड़ों भारतीयों के मन में एक विशेष स्थान बनाया। भारत के वैज्ञानिक और सामरिक विकास में उनके योगदान के साथ-साथ राष्ट्रपति के रूप में उनकी जनप्रिय छवि आज भी लोगों को प्रेरित करती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. कलाम का जीवन विज्ञान, तकनीक, राष्ट्रनिर्माण और युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देने वाला रहा है। उनका व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि ज्ञान, परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर देश के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है, जब देश के विकास में विज्ञान, नवाचार, तकनीकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
डॉ. कलाम के प्रति देश के शीर्ष नेतृत्व का सम्मान उनके बहुआयामी योगदान को रेखांकित करता है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में डॉ. कलाम की वैज्ञानिक प्रतिभा, देश की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके सम्मान को याद किया। डॉ. कलाम ने अपने वैज्ञानिक जीवन में भारत की मिसाइल और अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि विज्ञान और तकनीक का वास्तविक उद्देश्य देश को मजबूत बनाना तथा आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। डॉ. कलाम का जीवन राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर देश के लिए काम करने की प्रेरणा देता है। उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह भी था कि वे राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी आम लोगों, विद्यार्थियों और युवाओं से सहजता से संवाद करते थे।
गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें नमन किया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए डॉ. कलाम की वैज्ञानिक सोच, तकनीकी विकास और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दृष्टि विशेष रूप से प्रासंगिक है। उनका जीवन बताता है कि शिक्षा, अनुसंधान और नई तकनीकों में निवेश किसी भी समाज को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी डॉ. कलाम की जयंती पर उन्हें याद किया। डॉ. कलाम के विचारों में कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, निरंतर परिश्रम करने और असफलताओं से सीखने का संदेश प्रमुख रहा है। उनका जीवन संघर्षों से निकलकर उपलब्धियों के शिखर तक पहुंचने की ऐसी प्रेरक कहानी है, जो विद्यार्थियों, युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।
समाजवादी पार्टी ने भी डॉ. कलाम की जयंती पर श्रद्धांजलि व्यक्त की। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं द्वारा उन्हें याद किया जाना इस बात का संकेत है कि डॉ. कलाम का व्यक्तित्व किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं था। डॉ. कलाम ने अपनी सादगी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र के प्रति समर्पण से ऐसा सम्मान अर्जित किया, जिसे देश के अलग-अलग वर्गों में समान रूप से स्वीकार किया जाता है। उनकी पहचान एक ऐसे राष्ट्रपति की रही, जो सत्ता के औपचारिक वैभव से अधिक जनता, शिक्षा और राष्ट्र के भविष्य को महत्व देते थे।
15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे डॉ. अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम ने साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर भारत के महान वैज्ञानिकों में अपना स्थान बनाया। उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त की और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ देश के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्यक्रमों में योगदान दिया। भारत के स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रम और निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम में उनकी भूमिका ने देश की तकनीकी तथा सामरिक क्षमताओं को मजबूत बनाने में मदद की। अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइल प्रणालियों के विकास से जुड़े उनके योगदान के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में व्यापक पहचान मिली। वर्ष 2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और 2007 तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति भवन में रहते हुए भी उनकी पहचान एक सरल, सहज और विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय व्यक्तित्व के रूप में बनी रही। उन्हें वर्ष 1997 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
डॉ. कलाम का मानना था कि किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की सोच, शिक्षा और संकल्प पर निर्भर करता है। वे विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, ज्ञान अर्जित करने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी पुस्तकें ‘विंग्स ऑफ फायर’, ‘इग्नाइटेड माइंड्स’ और ‘इंडिया 2020’ आज भी युवाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का नाम नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 27 जुलाई 2015 को विद्यार्थियों को संबोधित करते समय उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार और आदर्श आज भी जीवंत हैं।
जयंती पर यही है सच्ची श्रद्धांजलि
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को याद करना केवल उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करना नहीं, बल्कि उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प लेना भी है। विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, शिक्षा के प्रति समर्पण, सार्वजनिक जीवन में सादगी, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान और देश के लिए कुछ बेहतर करने की भावना उनके जीवन की सबसे बड़ी सीख हैं। प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं तक की श्रद्धांजलियां इस महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति की व्यापक स्वीकार्यता को रेखांकित करती हैं। डॉ. कलाम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन विकसित, आत्मनिर्भर और वैज्ञानिक दृष्टि से सशक्त भारत का उनका सपना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
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