
संजीव रघुवंशी (वरिष्ठ पत्रकार)
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम (Ratlam) में एक व्यक्ति ने सरकार से 10006 करोड़ का मुआवजा मांगा है। दरअसल, कांतिलाल भील को सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) के आरोप में दो साल तक जेल में रहना पड़ा। बाद में कोर्ट (Court) ने सबूतों के अभाव में उसे बरी कर दिया। अब कांतिलाल ने अपने दो साल के हर पल का हिसाब बनाकर सरकार से मुआवजे के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सरकार उसके मुआवजे के दावे पर विचार करेगी या उसे बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी, इस बारे में तो अभी कुछ स्पष्ट नहीं, लेकिन एक बात जरूर साफ है कि अदालतों में लंबित मुकदमों का दंश अंतत: पक्षकारों को ही झेलना पड़ता है। फिर, चाहे वह अप्रैल, 2022 में बिहार (Bihar) की एक कोर्ट द्वारा बरी किए गए बीरबल भगत का मामला हो या फिर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (High Court) द्वारा मई, 2022 में रिहा किए गए चंद्रेश का मुकदमा। बीरबल को जब मर्डर के केस में गिरफ्तार किया गया तो उसकी उम्र 28 साल थी और जब बरी हुआ तो 56 साल। वहीं, चंद्रेश ने मर्डर के केस से बरी होने तक 13 साल जेल में गुजारे।Article : '' वीएस मलिमथ समिति ने मार्च, 2003 में दी रिपोर्ट में अदालतों में केसों के बढ़ते अंबार पर चिंता जाहिर करते हुए साफ शब्दों में कहा था कि केस जितना पुराना (Old) हो जाता है, उसमें फैसला आने या सही फैसला (Right Decision) आने की उम्मीद भी उतनी ही कम हो जाती है। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि मुकदमों के लंबा खिंचने की वजह से ही दोषसिद्धि का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। यह साल 2020 में 59.2 फीसदी था जो 2021 में गिरकर 57 फीसदी पर आ गया। गैर इरादतन हत्या और दुष्कर्म के मामले में तो दोषसिद्धि का आंकड़ा इससे भी ज्यादा खराब है। ''