सीता जैसी पत्नी, भरत तथा लक्ष्मण जैसे भाई मिलें तो आप भी बन सकते हैं राम
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 05:05 PM
Ayodhya Ram Mandir : प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना तथा जानी-मानी विचारक शोभना नारायण ने भगवान राम की अदभुत परिभाषा पेश की है। शोभना नारायण ने कहा है कि यदि सीता माता जैसी पत्नी हो, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न जैसे भाई मिलें और हनुमान जैसा सेवक मिल जाए तो हर इंसान राम के जैसा बन सकता है। शोभना नारायण ने यह भी कहा है कि भगवान राम ने ऐसी मर्यादा स्थापित की है जिसमें सत्ताा का जरा भी लालच नहीं है।
Ayodhya Ram Mandir
सत्ता का मोह नहीं है मेरे राम को
दुनिया भर में अपने नृत्य से प्रसिद्ध हुई शोभना नारायण ने एक छोटा सा आर्टिकल (लेख) लिखा है। अपने इस लेख में शोभना नारायण ने भगवान श्रीराम को अपने ढंग से परिभाषित करते हुए लिखा है कि....
सत्ता से निर्लिप्त, शांतिप्रिय राम मेरे सबसे करीब हैं। सत्ता की भूख नहीं उनको। तभी जो मिलना था, उसके एकदम विपरीत पाकर भी वह विचलित नहीं हुए। पलक झपकते राजा से वनवासी बनना स्वीकार कर लिया। सिंहासन पाने का कोई उद्यम, कोई छल-छद्म भी नहीं किया। वन जाकर उसी में रमे भी। संपूर्णता में वनवासी जीवन निभाया। हजारों-हजार, हर तरह के कष्ट सह कर भी। तब पर भी, किसी का उन्होंने बुरा नहीं सोचा। राम की शख्सियत के ढेरों आयाम हैं। मुझे सबसे ज्यादा प्रिय यही राम लगते हैं। और क्या मुझे, निजी स्तर पर सभी इससे सीख सकते हैं। बात यह पिता-पुत्र, पति-पत्नी तक के रिश्तों के लिए भी सही है। राम बिखरते शाश्वत मूल्यों और टूटती सामाजिक मर्यादाओं को पुनस्थापित करने का भी नाम है। मेरे राम ने किसी को अपशब्द नहीं कहा। ठेस नहीं पहुंचाई। अपमान किसी का नहीं किया। उत्तेजित कहीं नहीं हुए। चेहरे पर कभी व्यंग्य का भाव नहीं उभरा। हर तरफ वह नेकी ही बिखेरते रहे। मर्यादा कभी भी, किसी भी हालात में नहीं छोड़ी। अपनी मर्यादा बनाई, निभाई भी। चूंकि मैंने राम को तुलसीदास से भी जाना है और वाल्मीकि से भी। तो मुझे लगता है कि राम की शख्सियत बहुत बड़ी इसलिए भी हो सकी कि उनको माता सीता सी पत्नी मिलीं। लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न से भाई मिले, हनुमान से सेवक मिला।
कौन है शोभना नारायण
यहां हम आपको बता रहे हैं कि भगवान श्रीराम को अपने ढंग से परिभाषित करने वाली शोभना नारायण कौन हैं। कत्थक नृत्य को एक नए मुकाम पर पहुंचाने वाली शोभना नारायण का जन्म 2 सितंबर 1950 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। शोभना नारायण कत्थक नृत्यांगना के साथ एक सरकारी अफसर भी रह चुकी हैं। उन्हें पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। शोभना नारायण ने तीन साल की उम्र में कोलकता में साधना बोस की देखरेख में कत्थक सीखना शुरू कर दिया था। शोभना नारायण बताती हैं कि उन्होंने छोटी उम्र से कत्थक सीखना शुरू किया था। इसके बाद वह मुंबई चली गईं। वहां उन्होंने जयपुर घराने के गुरु कुंदनलाल जी सिसोदिया से आगे की शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में पंडित बिरजू महाराज से कत्थक की शिक्षा प्राप्त की थी।
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शोभना कहती हैं कि वे कभी भी कत्थक सम्राट बिरजू महाराज को नहीं भूलेंगी। उन्होंने बताया कि बिरजू महाराज ने दिल्ली में अपने प्रदर्शन से पहले उनके प्रदर्शन की घोषणा की थी। उनकी यह कृतज्ञता वह कभी भूल सकतीं। ऐसी है भगवान श्रीराम को अपने ढंग से परिभाषित करने वाली प्रसिद्घ कथक नृत्यांगना शोभना नारायण
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