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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में दान, चढ़ावे और अन्य आय के प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी की घटना के बाद देशभर में मंदिरों में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच उत्तराखंड के चारधाम से भी एक अहम अपडेट सामने आई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में दान, चढ़ावे और अन्य आय के प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। समिति ने साफ किया है कि दान-दक्षिणा के संग्रह, सुरक्षित रखरखाव और हिसाब-किताब में पूरी पारदर्शिता रखी जाए ताकि किसी तरह की शिकायत या वित्तीय अनियमितता की कोई गुंजाइश न रहे।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब मंदिरों में मिलने वाले नकद दान, चढ़ावे और अन्य आय के स्रोतों की निगरानी पहले से अधिक सावधानी के साथ की जाएगी। समिति चाहती है कि हर प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी हो और हर लेनदेन का सही रिकॉर्ड रखा जाए। मंदिरों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा अर्पित करते हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षित देखरेख और सही हिसाब-किताब सुनिश्चित करना समिति की प्राथमिकता बताया गया है।
2 जुलाई को जारी आदेश में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सोहन सिंह रंगार ने बद्रीनाथ, केदारनाथ और समिति के अधीन आने वाले अन्य सभी मंदिरों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश दान और चढ़ावा गिनने वाले केंद्रों, लेखा शाखाओं, खजाना अनुभाग, गेस्ट हाउस और पूजा काउंटरों पर कार्यरत सभी कर्मचारियों पर लागू होगा। समिति ने कहा है कि हर अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्व का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करे।
समिति ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि नकद दान, दान की गई सामग्री या मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। दान प्राप्त होने से लेकर उसे सुरक्षित रखने और उसका पूरा लेखा-जोखा तैयार करने तक हर प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी करनी होगी। समिति का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास भी बनाए रखती है।
समिति ने अपने निर्देशों में साफ किया है कि दान और चढ़ावे से जुड़ी हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जाए। इसका उद्देश्य भविष्य में किसी प्रकार की शिकायत या विवाद की स्थिति से बचना और पूरे सिस्टम को अधिक जवाबदेह बनाना है। दान और चढ़ावे का पारदर्शी प्रबंधन मंदिर प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित शाखाओं को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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