अब आप अपने बच्चों को लेक शतर्क हो जाइए। उन्हें कहीं भी अकेला न जाने दें, नहीं तो आपको एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। आपका बच्चा चोरी हो सकता है। यह बात हम नहीं, बल्कि गाजियाबाद पुलिस की गिरफ्त में आई दो महिला समेत चार लोगों ने खुलासा किया है। यह गैंग उत्तर प्रदेश से लेकर जम्मू कश्मीर और नेपाल में सक्रिय हैं। गैंग के सदस्य बच्चों को चोरी कर उन्हें बेच देते थे। जिसके एवज में उन्हें मोटी कमाई होती थी। Ghaziabad Samachar
बच्चा चोरी की जांच कर रही पुलिस ने किया खुलासा
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बीते 4 अगस्त को रशीद का एक वर्षीय बच्चा चोरी हो गया था। पीड़ित ने थाना ट्रॉनिका सिटी पर अपने बच्चे के अपहरण को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने बच्चे की बरामदगी के लिए तीन टीमों का गठन किया था। पुलिस टीमों ने मैन्युअल इनपुट सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच करते हुए बच्च को 4 घंटे के अंदर सकुशल बरामद कर उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया था। हालांकि अपहरण कर्ता फरार हो गए थे। पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर गुरुवार को दो महिला और दो पुरुष को गिरफ्तार किया है। इनकी पहिचान अफसर अली उर्फ अल्फाज, नावेद, संध्या और स्वाति उर्फ शाइस्ता के रूप में हुई है। आरोपियों ने उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि नावेद और अफसर ने मिलकर बच्चों का अपहरण करते हैं और उसे बेचने का प्रयास करते हैं। Ghaziabad Samachar
गैंग में इसलिए रहती हैं महिला
उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह गैंग में महिलाओं को इसलिए रखते हैं कि जब वह बच्चे चोरी करने जाते हैं, तो कोई उन पर शक न करे। उन्हें लगना चाहिए कि वह एक दंपत्ति हैं और परिवार के रूप में घूम रहे हैं। वह छोटे बच्चों का ज्यादा नजर रखते थे। जैसे ही बच्चा कोई सोसाइटी या किसी कॉलोनी में अकेला रहता था, तो यह लोग रैकी करते थे। काफी देर तक बच्चा अकेला रहता, तो आरोपी बच्चे को चोरी कर फरार हो जाते थे। चोरी करने के बाद वह अपने गैंग के दूसरे सदस्यों को बेचने के लिए दे देते थे।
बच्चा चोरी करते ही बेचने के लिए क्लाइंट को भेजते थे फोटो
गिरफ्तार आरोपी स्वाति उर्फ शाइस्ता अपनी दोस्त संध्या के माध्यम से बच्चों के फोटो को अपने नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली, बिजनौर, मुरादाबाद, रुड़की, अमरोहा आदि अपने क्लाइंट को भेज देते थे। जब क्लाइंट को बच्चा पसंद आता था, तो वह फिर उससे डील करते थे। डेढ़ लाख से लेकर ढाई लाख रुपए या फिर जो क्लाइंट अधिक रुपए देते थे। उसे आरोपी बच्चे को बेच देते थे। आरोपियों कोड वर्ड में अपने क्लाइंट से बात करते थे। बच्चों के नाम भी कोड वर्ड में रखे हुए थे। जिससे कोई भी उनकी बातों पर शक न करे।
बच्चे खरीदने की इन जगहों पर चल रही थी डील
फोटो को देखकर मुरादाबाद की एक पार्टी जो प्राइवेट नर्सिंग होम में नर्स के साथ ढाई लाख रुपए में नवजात बेचने की डील हुई, लेकिन किसी वजह से वह डील टूट गई। अमरोहा की दूसरी पार्टी से बच्चों को डेढ़ लाख रुपए में बेचने की डील हुई। इतना ही नहीं इस गैंग में नवजात को प्लॉट नाम के एक कोडवर्ड से बुलाया जाता था। पुलिस जांच में सामने आया कि यह एक सक्रिय गैंग है जो अपने नेटवर्क के माध्यम से नवजात शिशुओं का अपहरण कराकर अपने नेटवर्क के माध्यम से अपने साथी पार्टी शिशुओं की फोटो भेज कर डील किया करता था।
जन्म से पहले भी महिलाओं से बच्चे खरीदने की कर लेते थे डील
इस गैंग में डॉक्टर नर्स और चैरिटी कार्यकर्ता भी शामिल रहते थे, जो अनचाहे गर्भधारण वाली महिला या युवती को अपने बच्चे बेचने के लिए राजी करते थे तथा कुछ मामलों में बच्चे को जन्म देने वाली गरीब महिलाओं के बच्चे भी चुरा लिए जाते हैं फिर माता को बताया जाता है कि उनके बच्चे प्रसव के दौरान मर गए हैं। जब महिलाएं अपने मृत शिशु को देखने की मांग करती थे, तो उन्हें चुप रहने के लिए पैसे भी दिए जाते हैं। इस प्रकार मानव तस्करी करके कालाबाजारी कर काफी मोटी रकम इस गैंग के द्वारा अर्जित की जाती थी। अब पुलिस इस गैंग के अन्य सदस्यों तक भी जल्द पहुंचने की बात कह रही है। Ghaziabad Samachar