विजिलेंस की टीम ने खनन अधिकारी के ठिकानों पर की छापेमारी, 4 करोड़ से अधिक कीं नकदी बरामद

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस की टीम ने एक वरिष्ठ खनन अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। यह कार्रवाई राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में की गई।

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खनन अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Feb 2026 01:30 PM
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Vigilance Raid : ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस की टीम ने एक वरिष्ठ खनन अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। यह कार्रवाई राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में की गई। जानकारी के मुताबिक, माइंस विभाग के डिप्टी डायरेक्टर देबब्रत मोहंती को कथित तौर पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और अधिकारी को हिरासत में ले लिया।

फ्लैट और अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई

गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनके फ्लैट और अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रॉली बैग, सूटकेस और अलमारियों में छिपाकर रखी गई करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद हुई। इसके अलावा कुछ सोना और अन्य संपत्तियों के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इतनी बड़ी मात्रा में कैश की बरामदगी राज्य में अब तक की सबसे बड़ी जब्ती में से एक है।

संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही

पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही है। विजिलेंस विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि अधिकारी ने यह धन किस तरह अर्जित किया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। यह कार्रवाई ओडिशा में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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सस्ती हुई Triber पर टूट पड़े खरीदार, 2 लाख गाड़ियां बिकीं

ट्राइबर पिछले साढ़े छह साल से रेनो इंडिया के लिए सबसे बेहतरीन परफॉर्मर साबित हो रही है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के अंत तक भारत में ट्राइबर की कुल 2,00,253 यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है।

Renault Triber
यह सस्ती कार बनी 'बेस्ट सेलर' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar25 Feb 2026 12:20 PM
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Renault Triber : भारतीय कार बाजार में अपनी वापसी की रणनीति पर काम कर रही फ्रांसीसी कार कंपनी रेनो (Renault) के लिए यह समय बेहद उत्साहवर्धक है। एक तरफ कंपनी अपनी नई डस्टर एसयूवी को लेकर चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर उसकी लोकप्रिय एमपीवी 'ट्राइबर' (Triber) ने बिक्री के मोर्चे पर एक बड़ी मील का पत्थर पार कर लिया है। किफायती दाम, फैमिली फ्रेंडली डिजाइन और 7 सीटों का मिलना इस कार को भारतीय ग्राहकों की पसंद बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

GST 2.0 का फायदा, घटी कीमतें

रेनो ने पिछले साल जुलाई में ट्राइबर के फेसलिफ्ट मॉडल को लॉन्च किया था, जिसकी शुरुआती कीमत 6.30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) थी। हालांकि, जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद कंपनी ने इसकी कीमतों में भारी कटौती की। इसकी शुरुआती कीमत घटाकर 5.76 लाख रुपये कर दी गई, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ा। इस कदम ने खरीदारों को लुभाया और नतीजा यह रहा कि अब तक इस 7-सीटर कार की कुल 2 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं।

2 लाख से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री

अगस्त 2019 में अपनी शुरुआत करने वाली ट्राइबर पिछले साढ़े छह साल से रेनो इंडिया के लिए सबसे बेहतरीन परफॉर्मर साबित हो रही है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के अंत तक भारत में ट्राइबर की कुल 2,00,253 यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है। वहीं, घरेलू मांग के अलावा इस कार की दुनियाभर में भी अच्छी पकड़ है। दिसंबर 2025 तक इसकी 34,238 यूनिट्स का निर्यात भी किया जा चुका है। यह कार हैचबैक जैसी कीमत पर एमपीवी की सुविधा देती है, जिसके चलते फैमिली खरीदारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

6 साल बाद मिला शक्तिशाली अपडेट

ट्राइबर की मांग में हाल ही में आई तेजी का सबसे बड़ा कारण 23 जुलाई 2025 को लॉन्च किया गया नया मॉडल है। छह साल बाद मिले इस पहले बड़े अपडेट में कार का लुक पूरी तरह बदल दिया गया है। नए मॉडल में नए हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, स्लिम ग्लॉस ब्लैक ग्रिल और नया डायमंड लोगो दिया गया है, जो इसे पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक और आकर्षक बनाता है।

शक्तिशाली इंजन और बेहतर माइलेज

नई रेनो ट्राइबर में 1.0 लीटर, तीन सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 72 बीएचपी की पावर और 96 न्यूटन मीटर का टॉर्क उत्पन्न करता है। इसे मैनुअल और एएमटी दोनों तरह के गियरबॉक्स के विकल्पों के साथ खरीदा जा सकता है। माइलेज के मामले में भी यह कार बेहतर प्रदर्शन करती है और 19.59 से 19.76 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती है। इसके अलावा, खरीदारों को डीलर लेवल पर सीएनजी किट फिट करवाने का भी विकल्प मिलता है, जिस पर फैक्ट्री वारंटी भी मिलती है।

फीचर्स से लैस, सेफ्टी का ख्याल रखा गया

अंदरूनी हिस्से में भी इस कार को काफी आधुनिक बनाया गया है। इसमें नए लोगो वाला स्टीयरिंग व्हील, ब्लैक और ग्रे कलर की अपहोल्स्ट्री और 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम (ऐप्पल कारप्ले और एंड्रॉएड ऑटो सपोर्ट) दिया गया है। फीचर्स के तौर पर इसमें क्रूज़ कंट्रोल, ऑटो वाइपर, ऑटो हेडलैंप और ऑटो फोल्ड आउट साइड रियर व्यू मिरर (ORVMs) जैसी सुविधाएं हैं।

सुरक्षा के मामले में कंपनी ने कोई कोताही नहीं बरती है। स्टैंडर्ड के तौर पर इसमें 6 एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) के साथ इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकिंग डिस्ट्रीब्यूशन (EBD) और फ्रंट पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कम कीमत में इतने सारे फीचर्स और 7 सीटों का विकल्प मिलने के कारण रेनो ट्राइबर भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। Renault Triber 

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घर पर करेला उगाना है बेहद आसान, जानें विस्तृत प्रक्रिया

करेला उगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है सही बीज का चुनाव। आप बाजार या ऑनलाइन उच्च गुणवत्ता वाले ताजे और रोगमुक्त बीज खरीद सकते हैं। आपके पास हाइब्रिड या जैविक किस्म का विकल्प होता है। हाइब्रिड बीज जल्दी उगते हैं और अधिक उपज देते हैं।

Grow Bitter Gourd At Home
घर पर उगाए करेले के स्वास्थ्य लाभ (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar25 Feb 2026 11:01 AM
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Grow Bitter Gourd At Home: स्वाद में कड़वा होने के बावजूद सेहत के लिए करेला एक वरदान साबित होता है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने से लेकर डिटॉक्स और पाचन के लिए यह सब्जी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। आजकल बाजार में मिलने वाली मिलावट और रासायनिक खादों से बचने के लिए लोग घर पर जैविक सब्जियां उगाने की ओर बढ़ रहे हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि घर पर करेला उगाना मुश्किल है, तो आपकी यह धारणा गलत साबित हो सकती है। थोड़ी सी जानकारी और सही तरीके से आप अपनी बालकनी, छत या छोटे गमलों में आसानी से ताजा और जैविक करेले की फसल ले सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे बीज से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया को आप आसानी से अपना सकते हैं।

सही बीज और मिट्टी का चुनाव है पहला कदम

करेला उगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है सही बीज का चुनाव। आप बाजार या ऑनलाइन उच्च गुणवत्ता वाले ताजे और रोगमुक्त बीज खरीद सकते हैं। आपके पास हाइब्रिड या जैविक किस्म का विकल्प होता है। हाइब्रिड बीज जल्दी उगते हैं और अधिक उपज देते हैं, जबकि जैविक बीज पारंपरिक स्वाद और पोषण सुनिश्चित करते हैं। मिट्टी के मामले में, करेले के लिए हल्की और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। गमले या कंटेनर में पानी निकलने का रास्ता जरूर होना चाहिए। मिट्टी में खाद या कम्पोस्ट मिलाने से पौधों को जरूरी पोषण मिलता है और फसल अच्छी आती है।

बीज बोने का तरीका

बीज बोने से पहले उसे 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें, इससे अंकुरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है। एक गमले में केवल 2-3 बीज ही बोएं ताकि पौधों को पर्याप्त जगह मिल सके। बीज को लगभग 1 इंच गहरी मिट्टी में दबाएं और हल्का पानी दें। ध्यान रहे कि मिट्टी नम रहे, लेकिन पानी भरने से बचें।

धूप और पानी का तालमेल

करेला एक ऐसी सब्जी है जिसे अच्छी धूप की जरूरत होती है। इसे दिन में कम से कम 5-6 घंटे धूप मिलनी चाहिए। पानी का छिड़काव नियमित करें, लेकिन जड़ें सड़ने से बचाने के लिए पानी की मात्रा का ध्यान रखें। गर्मियों में पानी की जरूरत बढ़ जाती है, जबकि बारिश के मौसम में इसे कम कर देना चाहिए।

बेल को सहारा दें और रोगों से बचाएं

चूंकि करेला बेल के रूप में फैलता है, इसलिए इसे लकड़ी या जाल का सहारा देना जरूरी है। पौधे को हवादार जगह पर रखें। कीड़ों और रोगों से बचाव के लिए आप नीम के तेल या जैविक कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं।

समय पर कटाई है जरूरी

करेले की फसल जल्दी तैयार हो जाती है। जब फल लंबा और हल्का कड़ा हो जाए, तो उसे तुरंत तोड़ लें। ज्यादा पके हुए करेले कड़वे हो सकते हैं। नियमित रूप से फल तोड़ने से पौधे पर नए फल आने की संभावना बढ़ती है।

सामान्य समस्याओं का समाधान

अगर पत्तियों पर पीले धब्बे पड़ने लगें, तो पानी कम करें और पौधे को सीधी धूप में रखें। फल न लगने की स्थिति में पौधे को पर्याप्त धूप और हरी खाद दें। घर पर करेला उगाना न केवल आपको ताजी और केमिकल-फ्री सब्जी देता है, बल्कि यह बच्चों के लिए भी एक बेहतरीन सीखने का अनुभव साबित हो सकता है। थोड़ी सी मेहनत और सही देखभाल से आपकी रसोई घर की उगाई हुई पौष्टिक सब्जियों से भर सकती है। Grow Bitter Gourd At Home

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