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चुनाव आयोग की जांच में सामने आया कि कुछ पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं कर पाए। उन पर आरोप था कि उन्होंने निष्पक्षता नहीं बरती और कुछ मामलों में दुर्व्यवहार भी किया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, SDPO और थाना स्तर के अधिकारियों समेत कुल पांच अफसरों को निलंबित कर दिया गया।

Bengal Election: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद एक बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। वोटिंग के दौरान निष्पक्षता पर उठे सवालों ने अब ठोस कार्रवाई का रूप ले लिया है। Election Commission of India ने साफ संकेत दे दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में पांच पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है जिन पर गंभीर आरोप लगे थे।
23 अप्रैल को West Bengal में पहले चरण के मतदान के दौरान कई जगहों से तनाव और झड़प की खबरें सामने आई थीं। कुछ इलाकों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ तो कहीं उम्मीदवारों पर हमले की घटनाएं भी देखने को मिलीं। इन हालातों के बीच पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे खासकर डायमंड हार्बर क्षेत्र में।
चुनाव आयोग की जांच में सामने आया कि कुछ पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं कर पाए। उन पर आरोप था कि उन्होंने निष्पक्षता नहीं बरती और कुछ मामलों में दुर्व्यवहार भी किया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीपीओ और थाना स्तर के अधिकारियों समेत कुल पांच अफसरों को निलंबित कर दिया गया।
इस पूरे मामले में सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों पर ही कार्रवाई नहीं हुई बल्कि डायमंड हार्बर की पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशानी पाल को भी चेतावनी दी गई है। आयोग का कहना है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में अपने अधीन अधिकारियों पर नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी जिसमें कमी पाई गई।
चुनाव आयोग का यह कदम सिर्फ कार्रवाई नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे ऊपर है। आयोग ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो मामले की रिपोर्ट केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय तक भेजी जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद साफ है कि बाकी चरणों के मतदान में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ेगा। चुनाव आयोग की सख्ती से यह उम्मीद की जा रही है कि आगे के चरण शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे। बंगाल चुनाव हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे हैं लेकिन इस बार आयोग की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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