बेंगलुरु की एक कंपनी ने यूपी और बिहार समेत कुछ राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देने का फैसला किया। CEO के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी के भर्ती फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर भारत के कुछ राज्यों से आने वाले पुरुषों को नौकरी नहीं देने का फैसला किया है। कंपनी के सीईओ कार्तिक शेनॉय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। पोस्ट सामने आने के बाद कंपनी के भर्ती नियम और पूरे राज्यों के लोगों को एक श्रेणी में रखने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
A1 Sports World के CEO कार्तिक शेनॉय के मुताबिक, कंपनी के भीतर लंबी बातचीत और बहस के बाद यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि कंपनी अब उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुषों को नौकरी पर नहीं रखेगी। हालांकि, इस खबर में आगे हम मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े पहलू पर ध्यान दे रहे हैं। कार्तिक शेनॉय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस फैसले के लिए खेद भी जताया। उन्होंने बताया कि कंपनी में पहले से राजस्थान की एक महिला कर्मचारी काम कर रही है और उसने इस फैसले का समर्थन किया है।
कंपनी के सीईओ ने बताया कि इस फैसले के पीछे एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ा मामला है। उनके अनुसार, यह कर्मचारी एमबीए ग्रेजुएट था और भर्ती के समय पढ़ा-लिखा तथा सभ्य नजर आता था। बाद में कंपनी में उसके व्यवहार को लेकर महिला कर्मचारियों की ओर से लगातार शिकायतें मिलने लगीं। कार्तिक के अनुसार, शिकायतों के बाद उस कर्मचारी को कंपनी से निकाल दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी ने एक महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। A1 Sports World बच्चों के लिए स्पोर्ट्स प्रोग्राम चलाती है। इसलिए कंपनी के सीईओ ने इस मामले को गंभीर बताया।
कंपनी के इस फैसले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आलोचना करने वाले लोगों ने सवाल उठाया कि एक कर्मचारी के कथित गलत व्यवहार के आधार पर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे पूरे राज्यों से आने वाले पुरुषों को नौकरी के अवसर से दूर रखना कितना उचित है। कई यूजर्स का कहना है कि नौकरी के लिए उम्मीदवार की योग्यता और व्यक्तिगत व्यवहार को देखा जाना चाहिए, न कि उसके मूल राज्य के आधार पर सभी लोगों को एक नजरिए से देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठाया गया कि अगर किसी एक कर्मचारी से जुड़ी समस्या थी तो उसका समाधान भर्ती प्रक्रिया में बेहतर जांच और स्क्रीनिंग के जरिए क्यों नहीं किया गया।
कार्तिक शेनॉय की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने कहा कि अगर किसी कंपनी की भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार की योग्यता और चरित्र की जांच करने के बजाय पूरे राज्यों को ब्लैकलिस्ट किया जाता है, तो इससे भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के सभी पुरुषों को एक जैसा मानना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या एक कर्मचारी के व्यवहार की जिम्मेदारी उसी राज्य से आने वाले दूसरे लोगों पर डाली जा सकती है।
फैसले की आलोचना के बीच कार्तिक शेनॉय ने अपनी कंपनी के कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी भी साझा की। उन्होंने दावा किया कि A1 Sports World में कुल 32 कर्मचारी हैं, जिनमें 14 महिलाएं हैं। उनके अनुसार, कंपनी में 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं और 12 कर्मचारी दक्षिण भारत के राज्यों से बाहर के हैं। सीईओ ने यह भी कहा कि कंपनी में अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं। उनके अनुसार, इनमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख और बौद्ध कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने इन जानकारियों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि कंपनी का कार्यस्थल अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला है।
कार्तिक शेनॉय ने अपनी पोस्ट की आलोचना के जवाब में कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी लिंग, धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर भेदभाव किए बिना समान अवसर देने में विश्वास करती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय समाज में कई बार लोग किसी समस्या को स्वीकार करने के बजाय दूसरे मुद्दों का हवाला देकर जवाब देने लगते हैं। उनके अनुसार, समाज तब आगे बढ़ता है जब वह अपनी कमियों को स्वीकार करता है और उनमें सुधार की कोशिश करता है।
कार्तिक शेनॉय ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी सवाल उठाया कि उनके अनुसार उनकी पोस्ट पर आने वाले लगभग 85 से 90 फीसदी जवाब बिहार से क्यों आ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है। इस बयान के बाद विवाद का एक और पहलू सामने आया। जहां कंपनी अपने फैसले को एक पूर्व कर्मचारी से जुड़े अनुभव और कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, वहीं सोशल मीडिया पर कई लोग पूरे राज्यों के पुरुषों को एक ही नजरिए से देखने पर सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कंपनी के फैसले के बाद कर्नाटक को लेकर भी सवाल उठाए। इसके जवाब में कार्तिक शेनॉय ने कहा कि वह अपने राज्य की समस्याओं से वाकिफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी जगह पूरी तरह साफ-सुथरी नहीं है, लेकिन समस्याओं को स्वीकार करके उन्हें दूर करने की कोशिश की जाती है। फिलहाल इस पूरे मामले का केंद्र कंपनी की भर्ती नीति और उस पर सोशल मीडिया में चल रही बहस है। एक तरफ कंपनी के सीईओ इसे पूर्व कर्मचारी से जुड़े गंभीर अनुभव के बाद लिया गया फैसला बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि किसी एक व्यक्ति के कथित व्यवहार के आधार पर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आने वाले सभी पुरुष उम्मीदवारों के लिए एक समान भर्ती नियम लागू करना कितना उचित है।
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