पूर्व पीएम के पोते प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद, रेप केस में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
Bengaluru :
भारत
RP Raghuvanshi
26 Nov 2025 11:14 PM
भारत
RP Raghuvanshi
26 Nov 2025 11:14 PM
Bengaluru : लंबे समय तक चली सुनवाई और सबूतों की गहन जांच के बाद आखिरकार पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते और जेडीएस के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को शनिवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। बेंगलुरु की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उन्हें रेप और अश्लील वीडियो बनाने के मामले में दोषी पाते हुए यह सख्त सजा सुनाई है। कोर्ट ने 5 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका है। सजा सुनाए जाने के दौरान कोर्ट में रेवन्ना भावुक हो गया और फूट-फूट कर रो पड़ा। अदालत में मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर सन्न रह गए।
14 महीने में मुकदमा पूरा, 123 सबूत, 23 गवाह
सीआईडी की एसआईटी द्वारा की गई जांच में करीब 2000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें 123 भौतिक और डिजिटल साक्ष्य तथा 23 गवाहों के बयान शामिल थे। वीडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच, घटनास्थलों का निरीक्षण और तकनीकी विश्लेषण अदालत के सामने रखा गया। कोर्ट ने यह मुकदमा महज 14 महीने में पूरा कर दिया, जो देश के न्यायिक इतिहास में तेज गति से निपटाए गए मामलों में एक अहम मिसाल माना जा रहा है। शुक्रवार को ही कोर्ट ने प्रज्वल को दोषी करार दिया था, और शनिवार को सजा का ऐलान कर दिया गया।
2000 अश्लील वीडियो, ब्लैकमेल के गंभीर आरोप
रेवन्ना पर यह पहला फैसला है, लेकिन इससे इतर उन पर कई और गंभीर आपराधिक मामलों की जांच चल रही है। उन पर करीब 2000 अश्लील वीडियो बनाकर महिलाओं को ब्लैकमेल करने और उनका यौन शोषण करने का भी आरोप है। अप्रैल 2024 में उनके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद देशभर में हड़कंप मच गया था। इसके अलावा, बेंगलुरु साइबर क्राइम थाने में दो अन्य मामले दर्ज हैं, जबकि उनके पिता एचडी रेवन्ना के खिलाफ भी केआर नगर थाने में मामला लंबित है।
घरेलू सहायिका की शिकायत से खुला पूरा मामला
प्रज्वल के खिलाफ कार्रवाई की नींव एक घरेलू सहायिका द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर ने रखी थी। मैसूरु निवासी इस पीड़िता की शिकायत पर सीआईडी की विशेष जांच टीम ने गहन पड़ताल की। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर शोभा कर रही थीं। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए अंतत: उम्रकैद की सजा सुना दी।
राजनीतिक गलियारों में भूचाल
इस फैसले से न केवल कर्नाटक बल्कि देशभर के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। देवेगौड़ा परिवार की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा है। जेडीएस नेतृत्व ने इस पूरे मामले पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। रेवन्ना मामले में कोर्ट की सख्ती यह संकेत देती है कि यौन अपराधों में अब वीआईपी पहचान सुरक्षा कवच नहीं बनेगी। सवाल यह भी है कि क्या शेष मामलों में भी इतनी ही तेजी और निष्पक्षता से सुनवाई होगी?