आरसीबी के जश्न में पसरा मातम : चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़, 11 की मौत, कई घायल
Bengaluru
भारत
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 11:10 AM
भारत
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 11:10 AM
Bengaluru : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पहली आईपीएल ट्रॉफी जीत का जश्न एक दिल दहला देने वाली त्रासदी में बदल गया। एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर विक्ट्री सेलिब्रेशन के दौरान भारी भीड़ में मची भगदड़ में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को तत्काल उपचार के लिए पास के बॉरिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
अचानक स्थिति बेकाबू हुई
3 जून को पंजाब किंग्स को हराकर आईपीएल 2025 की ट्रॉफी अपने नाम करने वाली आरसीबी का स्वागत समारोह बेंगलुरु में ऐतिहासिक स्तर पर आयोजित किया गया था। चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हजारों की तादाद में जुटे प्रशंसक टीम की झलक पाने के लिए आतुर थे। भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की तैनाती तो की गई थी, लेकिन अचानक स्थिति बेकाबू हो गई।
अव्यवस्था ने ली मासूम जानें
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही फैंस ने स्टेडियम के गेट खुलने की भनक सुनी, हजारों की भीड़ एक साथ अंदर घुसने की कोशिश करने लगी। अफरा-तफरी के माहौल में कई लोग जमीन पर गिर पड़े और उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिला। भगदड़ के दौरान कुछ लोगों की दम घुटने से मृत्यु हुई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रशासन और पुलिस पर उठे सवाल
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। भीड़भाड़ की वजह से कई एंबुलेंस समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की गई है, लेकिन राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
जश्न बना शोक, पूरे शहर में शोक की लहर
आरसीबी के पहले खिताब की खुशी अब पूरे बेंगलुरु में शोक में बदल गई है। सोशल मीडिया पर इस हादसे को लेकर नाराजगी और संवेदनाएं दोनों व्यक्त की जा रही हैं। क्रिकेट जगत से लेकर सिनेमा और राजनीति के बड़े नामों ने इस दर्दनाक हादसे पर शोक जताया है।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए यह ऐतिहासिक जीत अविस्मरणीय तो है, लेकिन उससे जुड़ा यह हादसा भी शायद ही कभी भुलाया जा सके। सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए प्रशासन बेहतर योजना बना पाएगा, या हर जश्न के साथ खतरे की आशंका भी जुड़ी रहेगी?