Vijay Malya : भगोड़े विजय माल्या को चार महीने की जेल, जुर्माना भी लगाया
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 09:53 AM
New Delhi : देश की सुप्रीम अदालत (Supreme Court) ने सोमवार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) के खिलाफ अवमानना मामले में सजा सुना दी। कोर्ट ने माल्या को चार महीने की जेल की सजा सुनाई। उसे 2000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। अदालत ने माल्या से ब्याज के साथ चार करोड़ (40 मिलियन) डॉलर की रकम चार सप्ताह (Four week) के भीतर जमा करने का भी आदेश दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस यूयू ललित (UU Lalit), रवींद्र एस भट (Ravindra S. Bhat) और पीएस नरसिम्हा की बेंच ने की। बीते 10 मार्च को इस मामले पर कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा था कि माल्या के खिलाफ सुनवाई में अब कोई प्रगति नहीं हो सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए माल्या की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका 2020 में ही खारिज कर दी थी। माल्या के वकील ने 10 मार्च को कहा था कि ब्रिटेन में रह रहे उनके मुवक्किल से कोई निर्देश नहीं मिल सका है, इसलिए वह पंगु हैं और अवमानना के मामले में दी जाने वाली सजा की अवधि को लेकर माल्या का पक्ष रख पाने में वह असहाय हैं।
भगोडे कारोबारी विजय माल्या ने न सिर्फ विदेशी खातों में पैसे ट्रांसफर करने को लेकर कोर्ट को गलत जानकारी दी, बल्कि पिछले 5 साल से कोर्ट में पेश न होकर अवमानना को और आगे बढ़ाया है। माल्या को 9 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी। कोर्ट ने 10 मार्च को माल्या की सजा पर फैसला सुरक्षित रखा था। उसे 40 मिलियन डॉलर अपने बेटे सिद्धार्थ माल्या, बेटी लीना माल्या और तान्या माल्या के अकाउंट में ट्रांसफर करने और सम्पत्ति का सही ब्यौरा न देने के लिए अवमानना का दोषी करार दिया गया है।
भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में बैंकों के एक कंसोर्टियम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि माल्या 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन के रिपेमेंट पर अदालत के आदेशों का पालन नहीं कर रहा है। माल्या मार्च 2016 से यूके में है। वह अभी जमानत पर है।
कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ स्टेट बैंक के नेतृत्व में 13 बैंकों ने लंदन की अदालत में याचिका दायर की थी। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉर्पोरेशन बैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू और कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ एक अतिरिक्त लेनदार इस केस में मुख्य याचिकाकर्ता थे।