लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में आयोजित ‘भारतीय धरोहर सम्मान समारोह-2026’ में भारतीय धरोहर संस्था ने देश की ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने वाली तीन प्रमुख विभूतियों को सम्मानित किया। समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

National News : राजधानी दिल्ली में शनिवार की शाम भारतीय ज्ञान-विज्ञान, इतिहास, साहित्य और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन हुआ। लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में आयोजित ‘भारतीय धरोहर सम्मान समारोह-2026’ में भारतीय धरोहर संस्था ने देश की ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने वाली तीन प्रमुख विभूतियों को सम्मानित किया। समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने की। पूर्व लोकसभा सदस्य राजेंद्र अग्रवाल सहित देश के अनेक विद्वान, शोधकर्ता और गणमान्य लोग समारोह में शामिल हुए। National News
भारतीय धरोहर सम्मान-2026 से इस वर्ष तीन मनीषियों को सम्मानित किया गया। प्रोफेसर रामेश्वर मिश्र ‘पंकज’ को इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में उनके व्यापक अध्ययन, चिंतन और लेखन के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में उनके बौद्धिक योगदान और भारतीय ज्ञान यात्रा को समझने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान को आयुर्वेद अनुसंधान, नेत्र-विज्ञान और औषधि मानकीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वे श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के कुलपति हैं और केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के महानिदेशक भी रह चुके हैं। वहीं प्रोफेसर बलवंत सिंह राजपूत को आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वे प्रख्यात भौतिक विज्ञानी और कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रहे। अस्वस्थता के कारण वे समारोह में उपस्थित नहीं हो सके और उनकी ओर से उनके पुत्रों ने सम्मान ग्रहण किया। प्रत्येक सम्मानित व्यक्तित्व को एक लाख रुपये की सम्मान राशि, सम्मान पत्र, प्रतीक चिह्न और शाल भेंट की गई। National News
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के अमरत्व का मूल स्रोत उसकी चिरंतन ज्ञान परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना को समाप्त करने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन ज्ञान की यह परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही। शेखावत ने भारतीय धरोहर संस्था द्वारा देश की ज्ञान संपदा के संरक्षण और उसके सार्वजनिक सम्मान की पहल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सम्मानित तीनों विभूतियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मनीषियों ने अपने-अपने क्षेत्र में काम करते हुए देश की ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया है और भारत तत्व को अमर बनाने में योगदान दिया है। National News
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने भारतीय धरोहर के कार्यों को समाज और राष्ट्र की ज्ञान यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि आज के दौर में समाज के सामने टूटते परिवार और छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती हिंसा जैसी गंभीर चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में समाज को जोड़ना और सामाजिक मूल्यों को बचाना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार भारतीय धरोहर इसी दिशा में काम कर रही है और भारतीय ज्ञान यात्रा को समाज के सामने रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। राम बहादुर राय ने प्रोफेसर रामेश्वर मिश्र ‘पंकज’ के व्यापक अध्ययन और प्रमाणिक कार्यशैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन में गहन शोध और स्रोतों की प्रमाणिकता को महत्वपूर्ण बताया। National News
प्रोफेसर बलवंत सिंह राजपूत को विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच संवाद स्थापित करने वाले विद्वान के रूप में याद किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में लंबे समय तक शोध किया और उनके छह दशक लंबे शोध जीवन में 400 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हुए। उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्रों द्वारा सम्मान ग्रहण किया जाना समारोह का भावुक क्षण रहा। National News
प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान का सम्मान आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को रेखांकित करता है। आयुर्वेद अनुसंधान, नेत्र-विज्ञान तथा औषधियों के मानकीकरण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य को समारोह में विशेष महत्व दिया गया। समारोह में आयुर्वेद की प्रामाणिकता और गुणवत्तापूर्ण परंपरा को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। राम बहादुर राय ने आयुर्वेद के नाम पर बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता के प्रति लोगों को सजग रहने की बात कही। National News
इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में प्रोफेसर रामेश्वर मिश्र ‘पंकज’ के योगदान का उल्लेख करते हुए राम बहादुर राय ने उनके व्यापक अध्ययन को रेखांकित किया। समारोह में यह भी चर्चा हुई कि भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के अध्ययन में प्राथमिक स्रोतों और प्रमाणिक सामग्री का महत्व कितना अधिक है।
भारतीय धरोहर सम्मान ने इस वर्ष इतिहास-साहित्य, विज्ञान तथा आयुर्वेद—तीनों क्षेत्रों को एक मंच पर लाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के अलग-अलग आयामों को सामने रखा। National News
समारोह में वक्ताओं ने बताया कि ‘भारतीय धरोहर’ संस्था पिछले 21 वर्षों से प्राचीन भारत की ज्ञान-विज्ञान परंपरा को समाज और शासन के सामने वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने का कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य भारतीय ज्ञान संपदा, संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन तथा उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है। पूर्व लोकसभा सदस्य राजेंद्र अग्रवाल ने भी भारतीय धरोहर के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश में आत्मविश्वास और अपनी विरासत के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करने की दिशा में ऐसे प्रयासों की भूमिका महत्वपूर्ण है। National News
समारोह में भारतीय धरोहर के चेयरमैन रमेश कपूर, कार्याध्यक्ष प्रवीण शर्मा, वाइस चेयरमैन सुधीर गुप्ता और संजीव गोयल, उपाध्यक्ष महेश बाबू गुप्ता और अरुण गोयल, महामंत्री विजय शंकर तिवारी, कोषाध्यक्ष मोहन लाल शुक्ला, संयुक्त महामंत्री प्रो. जे.एस. चौहान सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। National News
भारतीय धरोहर सम्मान समारोह-2026 केवल तीन विभूतियों के सम्मान का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय ज्ञान परंपरा के तीन महत्वपूर्ण पक्षों—विज्ञान, इतिहास-साहित्य और आयुर्वेद—को एक साथ राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में रखा। राजधानी दिल्ली में आयोजित यह समारोह इस बात का भी संदेश देता है कि भारत की पारंपरिक ज्ञान संपदा पर आधुनिक संदर्भों में अध्ययन, शोध और संवाद की आवश्यकता लगातार बनी हुई है। National News
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