भोजपुरी के महान लोक कलाकार और ‘भोजपुरी के शेक्सपियर’ कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के परिवार से जुड़े सुशील कुमार ठाकुर की बिहार राजभवन में आशुलिपिक के पद पर सेवा समाप्त किए जाने का मामला चर्चा में है।

Bihar News : भोजपुरी के महान लोक कलाकार और ‘भोजपुरी के शेक्सपियर’ कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के परिवार से जुड़े सुशील कुमार ठाकुर की बिहार राजभवन में आशुलिपिक के पद पर सेवा समाप्त किए जाने का मामला चर्चा में है। सुशील कुमार ठाकुर का कहना है कि उनकी नियुक्ति तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के कार्यकाल में हुई थी। अब सेवा समाप्त किए जाने के फैसले को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए न्याय की मांग की है। कांग्रेस ने भी इस मामले पर आपत्ति जताते हुए बिहार सरकार और राजभवन के फैसले की आलोचना की है। Bihar News
सुशील कुमार ठाकुर का कहना है कि तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान उनके परिवार की आर्थिक स्थिति से परिचित थे। उनके अनुसार, राज्यपाल ने उनके घर जाकर परिवार की परिस्थितियों को देखा था। उनकी माता के अनुरोध और हिंदी साहित्य में उनकी शैक्षणिक योग्यता को ध्यान में रखते हुए उन्हें राजभवन में स्टेनोग्राफर के पद पर नियुक्त किया गया था। सुशील कुमार ठाकुर का तर्क है कि राज्यपाल संवैधानिक पद पर आने-जाने वाले व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में की गई वैध नियुक्ति को केवल सत्ता या प्रशासन में बदलाव के कारण समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इसी आधार पर अपनी सेवा समाप्ति के फैसले पर सवाल उठाए हैं। सुशील कुमार ठाकुर ने दावा किया कि उनकी सेवा समाप्त करने के लिए दक्षता परीक्षा को आधार बनाया गया, लेकिन नियुक्ति के बाद नई शर्तों को लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति के समय जो पात्रता और शर्तें लागू थीं, सेवा में आने के बाद उन्हें बदलकर पिछली तारीख से लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले ही उन्हें यह बता दिया गया था कि असफल रहने की स्थिति में उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। सुशील ठाकुर के मुताबिक, इसी पूरी प्रक्रिया के आधार पर उनकी नौकरी समाप्त की गई है और वह इस फैसले को चुनौती देने के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। Bihar News
सुशील कुमार ठाकुर ने अपनी सेवा समाप्ति को विडंबनापूर्ण बताते हुए कहा कि देश और बिहार के राजनीतिक नेता सार्वजनिक मंचों से भिखारी ठाकुर की कला और भोजपुरी संस्कृति के योगदान की चर्चा करते हैं। उनके नाम पर संस्थान और विश्वविद्यालय स्थापित करने की बातें भी होती हैं, लेकिन दूसरी ओर उनके परिवार के सदस्य को नौकरी से बाहर कर दिया गया।
उनका कहना है कि भिखारी ठाकुर की विरासत केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजपुरी समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले में निष्पक्षता के साथ विचार करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। Bihar News
इस मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सुशील कुमार ठाकुर की सेवा समाप्ति पर सवाल उठाते हुए इसे भोजपुरी समाज की भावनाओं से जोड़ दिया। कांग्रेस नेता का कहना है कि सुशील ठाकुर की नियुक्ति को केवल सामान्य प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे भोजपुरी भाषा और संस्कृति के सम्मान का पहलू भी था। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभवन के फैसले से भोजपुरी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। असित नाथ तिवारी ने कहा कि राजभवन सहित प्रत्येक संवैधानिक संस्था की अपनी निर्धारित सीमाएं और प्रक्रियाएं हैं। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति और सेवा समाप्ति नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने सरकार और राजभवन से इस मामले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर का भोजपुरी समाज से गहरा भावनात्मक संबंध है। इसलिए इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Bihar News
भिखारी ठाकुर भोजपुरी लोक संस्कृति के प्रमुख कलाकार, रंगकर्मी, कवि और लोकनाटककार के रूप में प्रसिद्ध रहे हैं। उन्होंने भोजपुरी भाषा और लोकजीवन से जुड़े सामाजिक मुद्दों को अपनी रचनाओं और नाटकों के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाई। उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें अक्सर ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ भी कहा जाता है। उनकी रचनाओं में सामाजिक कुरीतियों, प्रवासन, गरीबी, पारिवारिक रिश्तों और ग्रामीण जीवन की समस्याओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। Bihar News
विज्ञापन