
केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी(GST) ढांचे में किए गए बड़े सुधारों का सीधा असर अब उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान बनाने वाली दिग्गज एफएमसीजी कंपनियां—एचयूएल, आईटीसी, प्रॉक्टर एंड गैंबल और इमामी ने साबुन, शैम्पू, बेबी डायपर, टूथपेस्ट, रेज़र और आफ्टर-शेव लोशन जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतें घटाने का ऐलान कर दिया है। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। त्योहारी सीजन से पहले कंपनियों का यह कदम उपभोक्ताओं के लिए किसी ‘खास तोहफ़े’ से कम नहीं माना जा रहा। GST 2.0
जीएसटी काउंसिल ने टैक्स ढांचे को आसान बनाते हुए अब चार की बजाय केवल दो दरें—5% और 18%—लागू कर दी हैं, जबकि लग्ज़री प्रोडक्ट्स पर 40% की विशेष दर पहले की तरह बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में यह राहत सीधे आम उपभोक्ता की जेब हल्की करेगी और त्योहारी सीजन में बाज़ार की रौनक को और बढ़ाएगी। कंपनियों को भी उम्मीद है कि इससे खपत में तेज़ी आएगी और मांग का ग्राफ़ ऊपर जाएगा।
पीएंडजी ने विक्स, हेड एंड शोल्डर्स, पैंटीन, पैम्पर्स, जिलेट और ओरल-बी जैसे ब्रांड्स पर कीमतें घटा दी हैं।
विक्स इनहेलर: ₹69 से घटकर ₹64
हेड एंड शोल्डर्स कूल मेंथॉल (300ml): ₹360 से ₹320
पैंटीन शैम्पू (340ml): ₹410 से ₹355
पैम्पर्स डायपर और बेबी वाइप्स: जीएसटी दर घटने से कीमतों में कमी
जिलेट शेविंग क्रीम: ₹45 से ₹40
ओरल-बी टूथब्रश: ₹35 से ₹30
घरेलू कंपनी इमामी ने बोरोप्लस, नवरत्न ऑयल, झंडू बाम जैसे लोकप्रिय उत्पादों के दाम घटाए हैं।
बोरोप्लस एंटीसेप्टिक क्रीम (80ml): ₹165 से ₹155
नवरत्न आयुर्वेदिक ऑयल (180ml): ₹155 से ₹145
झंडू बाम (25ml): ₹125 से ₹118
केश किंग तेल (100ml): ₹190 से ₹178
बोरोप्लस साबुन पैक (6 का सेट): ₹384 से ₹342
देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी एचयूएल ने भी साबुन से लेकर शैम्पू और हेल्थ ड्रिंक तक की कीमतें घटाई हैं।
डव शैम्पू (340ml): ₹490 से ₹435
लाइफबॉय साबुन (4 पैक, 75g): ₹68 से ₹60
लक्स साबुन (4 पैक, 75g): ₹96 से ₹85
हॉर्लिक्स चॉकलेट (200g): ₹130 से ₹110
ब्रू कॉफी (75g): ₹300 से ₹270
किसान जैम (200g): ₹90 से ₹80
आईटीसी ने ऐलान किया है कि वह अपने पूरे एफएमसीजी पोर्टफोलियो में जीएसटी दरों में हुई कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों तक पहुँचाएगी। कंपनी का कहना है कि यह कदम न सिर्फ उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि बाज़ार में खपत बढ़ाने, निवेश को रफ्तार देने और नए रोजगार के अवसर पैदा करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी सुधार और उसके बाद कंपनियों की ओर से की गई कीमतों में कटौती उपभोक्ताओं के लिए इस त्योहारी सीज़न को और ख़ास बना देगी। हालांकि, सबकी नज़र इस बात पर टिकी रहेगी कि बढ़ी हुई मांग का असर कंपनियों की कमाई और देश की अर्थव्यवस्था पर कितना सकारात्मक पड़ता है। GST 2.0