बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद अब सरकार गठन की तैयारी में जुटे नीतीश कुमार को लेकर एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस बार मंत्रिमंडल के गठन का फार्मूला क्या होगा। 20 नवंबर को शपथ ग्रहण की तारीख तय होने के साथ ही एनडीए के नए मंत्रिमंडल के गठन की चर्चा भी जोरों पर है।

बता दे कि 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और जेडीयू के बीच सीटों का अंतर काफी बड़ा था। भाजपा ने 74 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि जेडीयू को 43 सीटें मिली थीं। उस समय मंत्री पदों के बंटवारे में भाजपा को अधिक हिस्सेदारी मिली थी, जिसके बाद जेडीयू को 12 और भाजपा को 22 मंत्री पद मिले थे। लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। दोनों दलों के बीच केवल 4 सीटों का ही अंतर रह गया है, जिससे 12-22 का पुराना फॉर्मूला अब लागू नहीं हो सकेगा।
इस बार भाजपा और जेडीयू दोनों ही 101-101 सीटों पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में एनडीए ने कुल 202 सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें भाजपा को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। ऐसे में कहा जा रहा है कि अब मंत्री पदों का बंटवारा समान रूप से 50-50 प्रतिशत हो सकता है। यानी कि जेडीयू और भाजपा को बराबरी का हिस्सा मिलेगा।
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और संविधान के अनुसार 15 प्रतिशत तक मंत्री बनाए जा सकते हैं, यानी 37 मंत्री पदों की संभावना है। ऐसे में जेडीयू के 15-16 मंत्री पद हो सकते हैं और भाजपा को भी लगभग इतने ही मंत्री पद मिल सकते हैं। साथ ही, एनडीए के अन्य सहयोगी दल जैसे चिराग पासवान की पार्टी को 2-3 मंत्री पद मिल सकते हैं, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को भी एक-एक मंत्री पद मिल सकता है।
बिहार में डिप्टी सीएम का फार्मूला 2005 से चलता आ रहा है, जब पहली बार एनडीए की सरकार बनी थी। अब तक इस फॉर्मूले के तहत नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और भाजपा के नेता डिप्टी सीएम रहे हैं। लेकिन इस बार सरकार गठन में सीटों का बंटवारा समान रूप से होने के कारण यह देखना होगा कि डिप्टी सीएम के पद पर कौन बैठता है। क्या बीजेपी और जेडीयू दोनों के पास एक-एक डिप्टी सीएम होगा, या फिर एक ही डिप्टी सीएम के पद पर सहमति बनेगी, यह बड़ा सवाल है।