देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग ने 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीख घोषित कर दी है और गुरुवार से नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। नामांकन की आखिरी तारीख 21 अगस्त है, जबकि 22 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 25 अगस्त तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। Vice Presidential Nomination
धनखड़ के इस्तीफे से खाली हुआ पद
21 जुलाई को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया जिसके चलते यह अहम संवैधानिक पद अब खाली है। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, लेकिन अब मध्यावधि चुनाव के तहत नया उपराष्ट्रपति चुना जाएगा, जो पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगा।
क्या है चुनाव का नंबर गेम?
उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के वोट से होता है।
लोकसभा: 543 में से 542 सदस्य
राज्यसभा: 245 में से 240 सदस्य (5 सीटें खाली)
यानी कुल प्रभावी वोटिंग संख्या – 782
जीत के लिए जरूरी वोट – 394
एनडीए को इस समय लोकसभा में 293 सांसदों, राज्यसभा में 129 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। इस तरह कुल 422 सांसद NDA के साथ, जो जरूरी बहुमत 394 से कहीं ज्यादा है। इसलिए NDA उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है। उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए ने रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है। शिवसेना (शिंदे गुट) ने बिना शर्त समर्थन का ऐलान किया है। जेडीयू, टीडीपी और अन्य सहयोगी दल भी पूरी तरह साथ। हाल ही में अमित शाह, जेपी नड्डा, बीएल संतोष सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में नाम पर चर्चा हुई। जल्द ही एनडीए अपना उम्मीदवार घोषित कर सकता है
INDIA गठबंधन भी एक्टिव
विपक्षी INDIA ब्लॉक भी संयुक्त उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। संख्याबल भले कमजोर हो लेकिन विपक्ष चाहता है कि वह एक मजबूत चेहरा पेश कर राजनीतिक संदेश दे सके। राहुल गांधी की डिनर पार्टी में उपराष्ट्रपति चुनाव टैरिफ और SIR जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। वहीं धनखड़ के इस्तीफे के वक्त विपक्ष ने आरोप लगाया कि धनखड़ ने सरकार के दबाव में आकर इस्तीफा दिया।
उपराष्ट्रपति बनने के लिए क्या है योग्यता?
भारतीय नागरिक होना जरूरी।
न्यूनतम उम्र – 35 वर्ष।
राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता।
भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
हालांकि अभी तक एनडीए और INDIA दोनों ने ही अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ होने की संभावना है। एक ओर जहां एनडीए के पास साफ बहुमत और संगठित समर्थन है, वहीं विपक्ष भी एक मजबूत नाम के ज़रिए राजनीतिक चुनौती देने की कोशिश में जुटा है। अब सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं कि कौन बनेगा भारत का अगला उपराष्ट्रपति?