
बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट इस बार सबसे हॉट और चर्चित सीट बनकर उभरी है। यहां का मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि दो बाहुबली घरानों की प्रतिष्ठा की जंग बन गया है। मैदान के एक छोर पर हैं जेडीयू के कद्दावर बाहुबली अनंत सिंह, जो मोकामा की राजनीति में वर्षों से किला जमाए बैठे हैं। दूसरी ओर हैं आरजेडी की नई दावेदार वीणा देवी, जो न सिर्फ पूर्व बाहुबली सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी हैं, बल्कि खुद भी सियासी अनुभव रखती हैं। तेजस्वी यादव ने जब सूरजभान सिंह को आरजेडी में शामिल कर लिया और उसी वक्त उनकी पत्नी वीणा देवी को मोकामा से टिकट थमाया, तो सियासी गलियारों में हलचल मच गई। Bihar Assembly Elections 2025
दिलचस्प यह भी है कि वीणा देवी पहले मुंगेर से एलजेपी सांसद रह चुकी हैं, और अब वे अपने पति सूरजभान के साथ आरजेडी के सियासी रथ पर सवार होकर मोकामा की सियासत में धमाकेदार एंट्री कर रही हैं। वहीं, सूरजभान ने हाल ही में पशुपति पारस की पार्टी एलजेपी (रामविलास) से इस्तीफा देकर तेजस्वी की पारी में नया मोहरा जोड़ दिया है। Bihar Assembly Elections 2025
मोकामा की राजनीति में बाहुबल का असर कोई नई बात नहीं है। 1990 के दशक से लेकर अब तक यह इलाका बाहुबली नेताओं के प्रभाव में रहा है। 2000 में खुद सूरजभान सिंह यहां से विधायक चुने गए थे, जब उन्होंने अनंत सिंह के बड़े भाई और तत्कालीन मंत्री दिलीप सिंह को मात दी थी। उसके बाद अनंत सिंह ने मोकामा में अपना वर्चस्व कायम किया और 2005 से 2020 तक लगातार जीत दर्ज की। अब हालात फिर से पुराने जैसे दिख रहे हैं—सूरजभान का परिवार एक बार फिर मोकामा में सक्रिय है, और सामने वही अनंत सिंह हैं, जिनसे 25 साल पहले सूरजभान ने मुकाबला किया था।
तेजस्वी यादव ने सूरजभान सिंह की एंट्री को आरजेडी के लिए एक बड़ा सियासी मास्टरस्ट्रोक बताया है। अब आरजेडी सिर्फ अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम वोट बैंक पर नहीं, बल्कि सवर्ण समाज, खासकर भूमिहार वोटरों में भी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है यह वही वर्ग है, जहां अनंत सिंह की पकड़ मानी जाती है। सूरजभान सिंह खुद भूमिहार समाज से आते हैं, और उनके आरजेडी में आने से पार्टी को इस वोट बैंक में नई उम्मीद दिख रही है। तेजस्वी की यह चाल मोकामा में न सिर्फ समीकरण बदल सकती है, बल्कि पूरे पटना-बेगूसराय बेल्ट की राजनीति पर असर डाल सकती है।
मोकामा की राजनीति हमेशा से जातीय समीकरणों पर टिकी रही है। यहां यादव, भूमिहार, कुशवाहा और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अनंत सिंह भूमिहार वर्ग में मजबूत पकड़ रखते हैं, जबकि वीणा देवी को यादव-मुस्लिम गठजोड़ के साथ-साथ सूरजभान के पुराने सवर्ण वोट बैंक का भी लाभ मिल सकता है। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय नहीं, बल्कि सीधे दो बाहुबलियों के बीच कांटे की टक्कर का बन गया है। एक ओर है अनंत सिंह का पुराना ‘किला’, तो दूसरी ओर सूरजभान का ‘सियासी कमबैक’। Bihar Assembly Elections 2025
बिहार की राजनीति में एक वक्त ऐसा भी था जब रेलवे का कोई ठेका सूरजभान सिंह के इशारे के बिना पास नहीं होता था। बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी, लेकिन अब उनकी पत्नी के जरिए वे फिर से मोकामा की सियासत के केंद्र में लौट आए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या तेजस्वी यादव का यह ‘बाहुबली दांव’ अनंत सिंह के दशकों पुराने किले को हिला पाएगा, या फिर मोकामा में ‘अनंत राज’ कायम रहेगा। Bihar Assembly Elections 2025